महाखुलासा पार्ट – 3 ‘फ्री का माल, करोड़ों का कारोबार!’ बीआरओ की आड़ में अवैध कमाई के आरोप, बीआरओ के ब्रिगेडियर -खनिज अधिकारी -ठेकेदारों की संपत्ति जांच की मांग उठी

सुकमा-बीजापुर में बीआरओ की आड़ में ‘पत्थर का साम्राज्य’? नियमों को ताक पर रखकर अवैध क्रेशर संचालन के आरोप, कथित सिंडिकेट से छत्तीसगढ़ सरकार को करोड़ों के राजस्व का हुआ नुकसान

ग्रामीणों ने कहा– क्रेशर प्लांट स्थापित करने के दौरान बीआरओ द्वार किये गए विकास और रोजगार के वादे आज भी अधूरे, पूर्व विधायक ने भी उठाए ग्रामसभा प्रक्रिया पर सवाल

ईश्वर सोनी सुकमा/बीजापुर

बीआरओ (Border Roads Organisation) की सड़क परियोजनाओं से जुड़े कार्यों को लेकर सुकमा और बीजापुर जिले में एक बार फिर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि बीआरओ परियोजना की आड़ में कथित रूप से अवैध क्रेशर प्लांट संचालित किए गए, बिना वैध अनुमति विस्फोटकों का उपयोग कर पहाड़ियों में ब्लास्टिंग की गई तथा निकाली गई गिट्टी का उपयोग केवल परियोजना तक सीमित न रहकर अन्य स्थानों पर भी किए जाने की आशंका है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित विभागों का पक्ष सामने आना बाकी है।

सूत्रों के अनुसार, कथित गतिविधियां पिछले लगभग एक वर्ष से लगातार चलती रहीं, लेकिन इसके बावजूद अब तक किसी जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई। इससे प्रशासनिक जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि बिना अनुमति विस्फोटकों का उपयोग और खनिज का उत्खनन हुआ, तो इसकी जानकारी संबंधित प्रशासनिक, वन एवं खनिज विभाग के अधिकारियों को थी या नहीं। यदि जानकारी थी, तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई और यदि

जानकारी नहीं थी, तो निगरानी व्यवस्था कैसे विफल रही।

मामले में यह भी चर्चा है कि परियोजना से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। स्थानीय स्तर पर मांग उठ रही है कि बीआरओ के संबंधित अधिकारियों सहित सभी जिम्मेदार विभागों की भूमिका की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि परियोजना के नाम पर सभी नियमों का पालन हुआ या नहीं।इधर, क्षेत्र में राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की चुप्पी भी चर्चा का विषय बनी हुई है। यदि आरोपों में तथ्य पाए जाते हैं तो मामला केवल अवैध खनन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, वन कानून, खनिज नियमों और विस्फोटक अधिनियम के पालन से जुड़े गंभीर प्रश्न भी सामने आएंगे।

*ग्रामीणों का दावा – रोजगार और सुविधाओं के वादे अधूरे*

ग्रामीणों का कहना है कि खनन कार्य शुरू कराने के दौरान गांव में स्कूल, आंगनबाड़ी, रोजगार, आर्थिक सहायता और अन्य विकास कार्यों का भरोसा दिया गया था, लेकिन अधिकांश वादे पूरे नहीं हुए। ग्रामीणों के अनुसार करीब 40 परिवारों वाले तुमलपाड़ गांव में आज तक स्कूल और आंगनबाड़ी शुरू नहीं हो सके हैं। स्थानीय युवक सोयम रामबाबू का कहना है कि गांव में स्कूल खुलने पर उन्हें शिक्षक के रूप में अवसर देने का आश्वासन मिला था, लेकिन न स्कूल शुरू हुआ और न ही रोजगार मिला।

*गांव के सरपंच इरपा किस्टैया का बयान*

“शुरुआत में ग्रामीण खनन के पक्ष में नहीं थे। बाद में गांव में स्कूल, आंगनबाड़ी, नलकूप, सड़क, खेतों की जुताई और अन्य विकास कार्य कराने का भरोसा मिलने के बाद प्रस्ताव दिया गया था।”

*ग्रामसभा अध्यक्ष कुहराम जोगा का बयान*

“खनन के संबंध में विधिवत ग्रामसभा आयोजित नहीं हुई। अधिकांश ग्रामीण शुरू से ही इसका विरोध करते रहे हैं।”

पूर्व विधायक मनीष कुंजाम का बयान

“विकास का मैं विरोधी नहीं हूं, लेकिन विकास कार्य ग्रामसभा की सहमति और आदिवासी परंपराओं के अनुरूप होने चाहिए। यदि ऐसा नहीं हुआ तो यह चिंताजनक है। ग्रामसभा की प्रक्रिया और विकास कार्यों के आश्वासनों को लेकर उठे सवालों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।”

*बीआरओ के अधिकारियों की भूमिका पर उठते सवाल*

स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी है कि सरकार का उद्देश्य नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सड़क निर्माण कार्यों को शीघ्र गति देना था। इसी संदर्भ में आरोप लगाए जा रहे हैं कि क्रेशर प्लांट स्थापित होने तक आवश्यक अनुमति प्राप्त करने तथा खनिज विभाग में संबंधित दस्तावेज जमा करने की प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए था। आरोप है कि यदि ऐसा नहीं किया गया और बिना वैध अनुमति के क्रेशर संचालन, विस्फोटकों का उपयोग तथा खनन किया गया, तो यह संबंधित नियमों के उल्लंघन का विषय हो सकता है।

स्थानीय लोगों और सूत्रों के हवाले से यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि परियोजना के लिए निकाली गई गिट्टी का उपयोग केवल बीआरओ कार्यों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अन्य निर्माण कार्यों में लगे ठेकेदारों को भी इसकी आपूर्ति की गई। कुछ लोगों ने यह भी दावा किया है कि पड़ोसी राज्य तेलंगाना के भद्राचलम और चेरला क्षेत्र तक बिना वैध फिटपास के गिट्टी भेजे जाने की आशंका है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

बीआरओ के नाम का इस्तेमाल कर अवैध गिटटी उत्खनन कर बाजार में बेचने के लिए व्हाट्सअप पर रेट लिस्ट भेजा जा रहा है

आरोप यह भी हैं कि बाहरी क्षेत्रों में जाने वाले कुछ गिट्टी से लदे वाहनों पर बीआरओ के स्टिकर लगे होने की बात सामने आई है। यदि जांच में यह तथ्य सही पाए जाते हैं, तो यह स्पष्ट करना आवश्यक होगा कि ऐसे स्टिकरों का उपयोग अधिकृत था या उनका कथित दुरुपयोग किया गया।इन सभी आरोपों के मद्देनज़र स्थानीय स्तर पर बीआरओ के संबंधित अधिकारियों, ठेकेदारों तथा खनिज, वन एवं जिला प्रशासन की भूमिका की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग उठ रही है।पूरे मामले को लेकर अब तक बीआरओ की तरफ से कोई आधिकारिक कथन नही आया , बीआरओ के एक अधिकारी से सम्पर्क करने पर मीडियाकर्मियों का नम्बर लेकर उच्च अधिकारी से चर्चा कर जानकारी देने की बात कही लेकिन 3 दिन बाद भी बीआरओ के किसी अधिकारी ने वापस मीडिया से सम्पर्क नही किया.