महानदी के तट पर आस्था का महाकुंभ, विकास की नई इबारत लिखेगा रुद्रेश्वर धाम
भव्य महानदी गंगा आरती से मिली नई आध्यात्मिक पहचान, 20 करोड़ के समग्र विकास परियोजना से धमतरी धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र
धमतरी – सावन माह के प्रथम 3 अगस्त को रुद्री स्थित प्राचीन रुद्रेश्वर महादेव मंदिर के सम्मिलन में पहली बार चित्रोत्पला महानदी के पवित्र तट पर बनारस की पूर्णिमा पर भव्य महानदी गंगा आरती का आयोजन हुआ। अब सावन के हर सोमवार को होगी महानदी गंगा आरती। धमतरी युवा ब्रिगेड एवं श्री रुद्रेश्वर महादेव परिवार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस अलौकिक कार्यक्रम में केवल एक धार्मिक परंपरा की शुरुआत नहीं की गई, बल्कि धमतरी की सांस्कृतिक अनूठे, आध्यात्मिक विरासत और पर्यटन को भी नई दिशा प्रदान की गई। हजारों मछुआरों की उपस्थिति, 108 दीपों से सजी महाआरती, वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और घंटियों की गूंज के बीच महानदी का तट दिव्य आभा से आलोकित हो उठा। दीपों की स्वर्णिम छटा और महानदी की शांत लहरों ने ऐसा अद्भुत वातावरण निर्मित किया कि काशी के घाटों का सजीव अनुभव हुआ।रुद्रेश्वर घाट पर आकर्षक विद्युत सज्जा, दीपों की शृंखला और रंग-बिरंगी रोशनी स्थापित की गई थी। दृष्टि होती है ही आश्रम का जनसैलाब घाट की ओर बाढ़। हर-हर महादेव और जय माँ महानदी के उद्घोषों से पर्यावरण भक्तिमय हो उठाओ। महाआरती से पूर्व कुंज विद्या स्कूल के छात्रों ने भगवान श्रीराम, भगवान शिव एवं भगवान जगन्नाथ की स्तुति में मधुर भजनों की स्तुति में भिक्षुओं के शिष्यों को भावविभोर कर दिया। इसके बाद रुद्रेश्वर महादेव मंदिर में स्वीकृत पूजा-सार्वभौमिक आरती एवं वैदिक रीति से चित्रोत्पला महानदी की गंगा आरती सहित क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति एवं जन कल्याण की मंगलकामना की गई। आरती के बाद आश्रम पर पवित्र जल का अवशेष और महाप्रसादी का वितरण किया गया।
इस अवसर पर धमतरी के विधायक ओंकार भंडारी, महापौर रामू रोहरा, देवता अबिनाश मिश्रा, पूर्व विधायक श्रीमती रंजना भंडारी सहित कई दिग्गज, अधिकारी एवं उपराष्ट्रपति श्री रामू रोहरा शामिल हैं। सभी ने महानदी की अविरल धारा, प्रकृति संरक्षण और सामाजिक समरसता की कामना करते हुए इस आयोजन को जनआस्था के ऐतिहासिक पर्व के रूप में बताया।
यह आयोजन तब हुआ जब राज्य शासन द्वारा रुद्रेश्वर महादेव मंदिर परिसर के समग्र विकास के लिए लगभग 20 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी परियोजना तैयार की गई। संस्कृति एवं पर्यटन विभाग के माध्यम से प्रस्तावित इस परियोजना के तहत मंदिर परिसर का विकास, धार्मिक गरिमा, सांस्कृतिक संरक्षण और आधुनिक समग्र समन्वय के साथ काम किया जाएगा। तीन चरणों में विकसित की जाएगी इस योजना में पारंपरिक भारतीय मंदिर स्थापत्य शैली को संरक्षित करते हुए मुख्य प्रवेश द्वार, शिखर, दीप स्तंभ, नंदी प्रतिमा, तोरण, सौंदर्यीकरण एवं वास्तुशिल्प के लिए सुव्यवस्थित अधोसंरचना विकसित की जाएगी।
परिसर में केंद्र-आस्थिर तीर्थयात्रा मार्ग, विश्राम स्थल, प्रसाद एवं स्मृति केंद्र, खाद्य न्यायालय, डिजिटल सूचना प्रणाली, स्वास्थ्य, स्थापत्य आधारित स्वास्थ्य चेकअप कियोस्क, सिलिकॉन शौचालय, रेलिंगयुक्त-अनुकूल मंदिर, सुरक्षित घाट, रेलिंगयुक्त विसर्जन कुंड और स्थापत्य की व्यवस्था की व्यवस्था विकसित की जाएगी। साथ में है गार्डन, सांस्कृतिक मंडप, रिवर फ्रंट सैट, ओपन एयर स्टेज और भविष्य की मरीन ड्राइव अवधारणाएं, रुद्रेश्वर धाम को धार्मिक पर्यटन के लिए एक आधुनिक केंद्र के रूप में स्थापित किया गया। संरक्षण पर्यावरण को प्राथमिकता दी गई है जिसमें सौर ऊर्जा आधारित सांख्यिकी, ईवी वर्षा स्टेशन, वर्षा जल संरक्षण, हरित क्षेत्र विस्तार और वैज्ञानिक पारिस्थितिक तंत्र व्यवस्था व्यवस्थाएं भी शामिल हैं।
महानदी गंगा आरती की शुभ शुरुआत और रुद्रेश्वर धाम के प्रस्तावित समग्र विकास की परिकल्पना सामूहिक धमतरी के लिए एक नए युग का संकेत हैं। यह केवल धार्मिक आयोजन या अधोसंरचना विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय संस्कृति, पर्यटन, रोजगार, पर्यावरण संरक्षण और जनसहभागिता को एक सूत्र में पिरोने का माध्यम बनाने का प्रयास है। अगले वर्षों में रुद्रेश्वर धाम की श्रद्धा, संस्कृति और सतत विकास का ऐसा अनूठा केंद्र बना, जिसने धमतरी को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाकर नई प्रतिष्ठा प्रदान की।
