शिक्षक साहित्य परिषद छत्तीसगढ़ का बड़ा आयोजन

पंचामृत’ विषय पर अखिल भारतीय काव्य प्रतियोगिता, 26 जुलाई तक भेजें अपनी प्रविष्टियां

राजिम :–छत्तीसगढ़ की अग्रणी साहित्यिक संस्था ‘शिक्षक साहित्य परिषद’ ने अपनी सृजनात्मक गतिविधियों को विस्तार देते हुए अखिल भारतीय स्तर पर एक भव्य काव्य प्रतियोगिता का आयोजन किया है। परिषद ने इस बार ‘पंचामृत’ विषय पर देश भर के साहित्यकारों और कवियों से मौलिक रचनाएं आमंत्रित की हैं.पंचामृत’ – पर्यावरण और भविष्य की एक नई दृष्टि शिक्षक साहित्य परिषद छत्तीसगढ़ के संयोजक सागर शर्मा ने बताया कि इस वर्ष की प्रतियोगिता का विषय ‘पंचामृत’ रखा गया है। यह विषय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2021 के अंतरराष्ट्रीय जलवायु शिखर सम्मेलन में दिए गए ‘पंचामृत’ मंत्र से प्रेरित है।यह विषय मात्र एक शब्द नहीं, बल्कि विश्व की सबसे बड़ी चुनौतियों—जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, सतत विकास और शून्य उत्सर्जन—को संबोधित करने वाला एक संकल्प है। संस्था का उद्देश्य साहित्य के माध्यम से इन गंभीर वैश्विक विषयों पर जन-जागरूकता लाना और भावी पीढ़ियों को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाना है।पुरस्कार एवं सम्मान प्रतियोगिता के संदर्भ में जानकारी देते हुए संयोजक सागर शर्मा ने बताया कि निर्णायक मंडल द्वारा चयनित उत्कृष्ट 21 रचनाकारों को विशेष रूप से पुरस्कृत एवं सम्मानित किया जाएगा। प्रत्येक विजेता को ₹1100 की नगद राशि, प्रशस्ति पत्र, प्रतीक चिन्ह एवं पुस्तक भेंट की जाएगी। इसके अतिरिक्त, प्रतियोगिता में प्राप्त अधिकांश स्तरीय रचनाओं को एक ‘साझा काव्य संग्रह’ (एंथोलॉजी) के रूप में पुस्तक का रूप दिया जाएगा।प्रतियोगिता के नियम एवं शर्तें संयोजक सागर शर्मा ने प्रतियोगिता में भाग लेने के इच्छुक रचनाकारों के लिए विस्तृत जानकारी साझा की है:प्रविष्टि भेजने की अंतिम तिथि 26 जुलाई 2026 रखी गई है.रचना अधिकतम 24 पंक्तियों की होनी चाहिए। रचना पूरी तरह से मौलिक एवं अप्रकाशित होनी चाहिए। साहित्य प्रेमी और रचनाकार अपनी प्रविष्टियां व्हाट्सएप नंबर 8839628223 पर भेज सकते हैं.पिछले सफल आयोजन की गौरवमयी परंपरा संस्था ने इससे पूर्व ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसे प्रेरणादायक विषय पर एक सफल अखिल भारतीय काव्य प्रतियोगिता का आयोजन किया था, जिसे देश भर से अभूतपूर्व प्रतिसाद मिला था। उस आयोजन के उपरांत आयोजित भव्य सम्मान समारोह एवं पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के माननीय राज्यपाल रमेन डेका मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए थे। सम्मान कार्यक्रम में प्रदेश के संस्कृति मंत्री मुख्य अतिथि थे, जिन्होंने विजेता रचनाकारों का उत्साहवर्धन किया था.साहित्यकारों से जुड़ने का आह्वान संयोजक सागर शर्मा ने कहा कि पिछली बार की तरह ही इस बार भी साहित्य प्रेमियों में काफी उत्साह देखा जा रहा है। उन्होंने देश भर के कवियों से अपील की है कि वे अपनी लेखनी से पर्यावरण और प्रकृति के इस विमर्श को समृद्ध करें। उन्होंने कहा, “साहित्यकार समाज का आईना होता है, और जब आईना पर्यावरण संरक्षण की बात करता है, तो बदलाव निश्चित है।परिषद ने देश भर के रचनाकारों से आग्रह किया है कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर अपनी उत्कृष्ट प्रविष्टियां भेजें ताकि साहित्यिक मंच पर उन्हें उचित सम्मान और स्थान मिल सके. उक्त जानकारी शिक्षक साहित्य परिषद के सदस्य पूरन लाल साहू (व्याख्याता) ने दी*