जिले के 400 प्रगतिशील किसानों का पांच दिवसीय प्रशिक्षण एवं भ्रमण कार्यक्रम संपन्न

मखाना की वैज्ञानिक खेती से किसानों को मिलेगा आय का नया विकल्प

महासमुंद – कृषि विविधीकरण को बढ़ावा देने और किसानों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से उद्यानिकी विभाग द्वारा जिले के 400 प्रगतिशील किसानों के लिए मखाना की वैज्ञानिक खेती पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण एवं भ्रमण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। 1 जुलाई से 5 जुलाई 2026 तक आयोजित इस कार्यक्रम में बागबाहरा, पिथौरा, बसना, सरायपाली एवं महासमुंद विकासखंड के किसानों ने सहभागिता कर मखाना उत्पादन की आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया।कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम लिमिटेड के अध्यक्ष श्री चंद्रहास चंद्राकर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं मखाना परियोजना के समन्वयक डॉ. गजेन्द्र चंद्राकर ने किसानों को मखाना उत्पादन की वैज्ञानिक विधियों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बीज चयन, बुवाई का उपयुक्त समय, तालाब प्रबंधन, पोषक तत्व प्रबंधन, रोग एवं कीट नियंत्रण, फसल की कटाई, प्रसंस्करण तथा विपणन के संबंध में तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने बताया कि मखाना एक उच्च मूल्य की नकदी फसल है, जिसकी खेती कम लागत में बेहतर आर्थिक लाभ प्रदान कर सकती है। यह फसल कृषि विविधीकरण के साथ किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन रही है।मुख्य अतिथि  चंद्रहास चंद्राकर ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि बदलते समय के साथ परंपरागत खेती के साथ-साथ नई एवं लाभकारी फसलों को अपनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मखाना की खेती किसानों को अतिरिक्त आय उपलब्ध कराने के साथ जल संसाधनों के बेहतर उपयोग और आत्मनिर्भर कृषि व्यवस्था को भी सुदृढ़ करेगी। उन्होंने किसानों से प्रशिक्षण में प्राप्त तकनीकी ज्ञान को अपने खेतों में अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि किसी भी प्रशिक्षण की वास्तविक सफलता उसके व्यवहारिक क्रियान्वयन में निहित होती है।प्रशिक्षण एवं भ्रमण कार्यक्रम के दौरान किसानों ने मखाना उत्पादन की तकनीकों को निकट से समझा तथा इसे अपने क्षेत्र में अपनाने के प्रति उत्साह व्यक्त किया। किसानों ने कहा कि कम लागत, बेहतर बाजार संभावनाओं और अधिक लाभ के कारण मखाना भविष्य में उनके लिए आय का एक मुख्य स्रोत बन सकता है।कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. एकानंद ढीमर, डॉ. योगेन्द्र चंदेल, प्रबंधक  संजय नामदेव एवं  शिव साहू का विशेष योगदान रहा। सहायक संचालक उद्यान पायल साहू ने बताया कि विभाग द्वारा किसानों को नवीन तकनीकों से जोड़ने तथा कृषि आधारित आजीविका के नए अवसर उपलब्ध कराने के लिए इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम निरंतर आयोजित किए जा रहे हैं।