भारतीय दलित साहित्य अकादमी छत्तीसगढ़ द्वारा सदगुरु कबीर जयंती पर धमतरी में प्रतिभा सम्मान कबीर चर्चा व काव्य गोष्ठी सम्पन्न 

धमतरी/गुरुर :– भारतीय दलित साहित्य अकादमी के छ.ग. राज्य इकाई द्वारा धमतरी स्थित गोंडवाना भवन में सदगुरु कबीर साहेब की 629 में जयंती मनाई गई, कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अकादमी के राज्य अध्यक्ष प्रो. जी आर ज्वाला थे। तथा अध्यक्षता श्रीमती सुशीला वाल्मीकि ने की, कार्यक्रम की शुरुआत काव्य गोष्ठी से हुई, जिसमें अधिकांश रचनाकारों ने अपनी मातृभूमि प और वर्षा ऋतु पर आधारित काव्य रचनाएं की, घनश्याम ठाकुर ने काव्य पाठ की शुरुआत कुछ इस प्रकार किया-भारत भूंईया के बरोबर भूंईया,तै दुनिया में पाबे कहां रे, अइसन भूंईया ल छोड़ के संगी तै पछतावे तंहा रे,मानसिंह ध्रुव ने कहा-संगी आषाढ़ आगे रे संगी आषाढ़ आगे ना, झांझ भगागे जेठ के संगी अउ बादर करियागे नजगदलपुर से पधारे डॉ बी. प्रकाश मूर्ति ने अपनी हिंदी रचना कुछ इस प्रकार पढ़ी-मिट्टी का सुखा टुकड़ा निहार रहा था अंबर को कई महीनो से एकाएक, जैसे कर रहा हो, किसी अपनो का इंतजार, कोरबा की श्रीमती कौशल्या खुराना ने कहा

*सरग बरोबर लागे दाई तोर अचरा के छांव ओ*.

कवि गोष्ठी में जिन लोगों ने अपनी रचनाएं पढ़ी उनमें बुधराम साहू, आत्माराम पटेल, मानसिंह ध्रुव, डॉ रमेश सोसायटी तथा विशिष्ट अतिथि के क्रम में डां रोहन भारद्वाज प्रमुख रहे, इस अवसर पर खैरागढ़ की छात्र सुश्री लीला चौहान ने शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुत कर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाया.  कार्यक्रम का सफलतापूर्वक संचालन विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित प्रोफेसर के. मुरारी दास ने किया, कभी गोष्ठी के पूर्व उपस्थित अतिथियों और कवियों का स्वागत प्रेम साइमन, मदन लहरें व धनेश्वर प्रसाद साहू द्वारा किया गया,  कार्यक्रम के पूर्व में अतिथियों द्वारा सदगुरु कबीर के तेल चित्र पर माल्यार्पण कर कभी गोष्ठी की शुरुआत की गई. इस अवसर पर राज्य के कोई 20 प्रतिभाओं को विशिष्ट सम्मानों से अलंकृत किया गया।