सेंट्रल लाइब्रेरी सह मावा मॉडल से 89 बच्चों ने पाई कार सेवा में सफलता पाई

कोयाबाना संग्रहालय ज्यूबियन और गोंडी-हल्बी भाषा शिक्षण से पुनः जा रही सांस्कृतिक विरासत

उत्तर कांकेर – जिला मुख्यालय कांकेर स्थित ऐतिहासिक ऐतिहासिक आश्रम में शिक्षा, संस्कृति और विद्यार्थियों के आकर्षण का केंद्र बिंदु उभर रहा है। कलेक्टर श्री नीलेश कुमार महादेव क्षीरसागर एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री हरेश मंडावी के निर्देशन में संचालित सेंट्रल लाइब्रेरी सह मावा मॉडल जिले के विद्यार्थियों एवं युवाओं को प्रेरणा का केंद्र बनाया गया है। यहां अध्ययनरत छात्र-छात्रा न केवल घाटी पर्यटन की तैयारी कर रहे हैं, बल्कि अपने सपने को साकार करने की दिशा में भी गांव से कदम बढ़ा रहे हैं। जिला प्रशासन की महत्वाकांक्षी पहल ‘हमर लक्ष्य’ के तहत विकसित यह केंद्र आज शिक्षा, कंसल्टेंट परीक्षा दिशानिर्देश, भाषा संरक्षण और सांस्कृतिक पहल का उत्कृष्ट उदाहरण बन गया है। यह सबसे पहले युवाओं के सपनों को नई दिशा देने के साथ-साथ जिले की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।सेंट्रल लाइब्रेरी सह मावा मॉडल के शोधकर्ता जिला एवं मिशन समन्वयक नवनीत पटेल ने बताया कि वर्तमान में प्रतिदिन लगभग एक हजार विद्यार्थी इस अध्ययन केंद्र का लाभ उठा रहे हैं। यहां छात्रों के लिए शांत एवं सुव्यवस्थित अध्ययन वातावरण उपलब्ध कराया गया है। वर्तमान में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग सहित विभिन्न पर्वतीय गांवों की तैयारियों के लिए विशेष सैलून संचालित किये जा रहे हैं। इसके साथ ही उप निरीक्षक भर्ती परीक्षा की तैयारियों के लिए आयोजित की जा रही हैं, विशेष लाभ बड़ी संख्या में प्रतिभागियों को उठाया जा रहा है।जिला शिक्षा पदाधिकारी  रमेश कुमार नॉहाद के निर्देशन में इस अध्ययन केंद्र को और अधिक विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। यहां उपलब्ध सुविधाओं और विशेषज्ञ दिशानिर्देशों का सकारात्मक परिणाम है कि अब तक इस केंद्र से अध्ययन कर 89 बच्चों को अलग-अलग सामान और सामान पर सफलता प्राप्त हुई है। यह उपलब्धि इस केंद्र की योग्यता और दस्तावेजों को प्रमाणित करती है।पुराना समूह केवल शिक्षा का केंद्र नहीं है, बल्कि आदिवासी संस्कृति और संस्कृति के संरक्षण का भी महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है। क्षेत्र में स्थापित कोयाबाना ज्यूबियन संग्रहालय में स्थानीय जनजातीय संस्कृति, बौद्ध धर्म, बौद्ध धर्म और इतिहास को संरक्षित करने का कार्य किया जा रहा है। इसके साथ ही यहां गोंडी एवं हल्बी सीमैप का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। वर्तमान में लगभग 80 आदिवासी यहाँ समुद्री अध्ययन से जुड़े हुए हैं, जिससे नई पीढ़ी अपनी मातृभाषा और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े रह सके। परिसर का ऐतिहासिक प्रवेश द्वार, उद्यान, हरियाली और स्वच्छ वातावरण इसे और लुभावने हैं। यहां आने वाले छात्र, अभिभावक और पर्यटन इस परिसर के मंदिर और वास्तुकला के विशेषज्ञ हैं।