राजस्व एवं जिला प्रभारी मंत्री  टंकराम वर्मा ने प्राकृतिक खेती को स्वस्थ, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत का आधार बताया

संबलपुर में आयोजित प्राकृतिक कृषि आश्रम एवं कृषि मेले में किसानों की बैठक आयोजित की गई

आमदी में सरस्वती शिशु मंदिर भवन और संबलपुर में किसान कुटी निर्माण के लिए 10-10 लाख रुपये की घोषणा

धमतरी – जिले के संबलपुर स्थित कृषि केंद्र के प्रमुख आयोजन में राजस्व एवं जिला प्रभारी मंत्री  टंकराम वर्मा ने कहा कि प्राकृतिक एवं जैविक विज्ञान केवल कृषि पद्धति नहीं, बल्कि स्वस्थ समाज, सुरक्षित पर्यावरण और आत्मनिर्भर किसान की जरूरत है। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे रासायनिक उत्पादों और रसायनों पर आधारित प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ें, जिससे भूमि की उर्वरा शक्ति संरक्षित रहे और आने वाली वस्तुओं को स्वस्थ भोजन उपलब्ध हो सके।प्रभारी मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि भारत कृषि प्रधान देश है और गांव इसकी आत्मा हैं। पूर्व में कृषि व्यवस्था प्रकृति एवं पशुधन पर आधारित थी, जिससे उत्पादन के साथ-साथ स्वास्थ्य एवं पर्यावरण का संतुलन भी बना रहता था। उन्होंने कहा कि आज बढ़ते रासायनिक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है और कई स्वास्थ्य संबंधी वैज्ञानिक सामने आ रहे हैं। ऐसे समय में प्राकृतिक खेती की ओर लौटना समय की आवश्यकता है। मंत्री श्री वर्मा ने किसानों को बीज मिनिकिट उपकरण सहित कृषि उपकरण दिये।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों की आय बढ़ाने, कृषि को बढ़ावा देने और खेती को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। किसान सम्मान निधि सहित किसानों को विभिन्न प्रकार की आर्थिक सहायता एवं तकनीकी सहायता उपलब्ध करायी जा रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार भी किसानों के हित में लगातार काम कर रही है और कृषि को अधिक समृद्ध और टिकाऊ बनाने का प्रयास कर रही है।कार्यक्रम में प्रभारी मंत्री ने मेरठ में सरस्वती शिशु मंदिर भवन निर्माण के लिए 10 लाख रुपये और संबलपुर में किसानों के लिए किसान कुटी निर्माण के लिए 10 लाख रुपये की मांग की। उन्होंने कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों को किसानों को प्राकृतिक खेती, जैविक खाद निर्माण और उन्नत कृषि प्रौद्योगिकी के संबंध में सतत मार्गदर्शन प्रदान करने के निर्देश दिये।इस अवसर पर कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रेम साहू ने प्राकृतिक खेती के महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा पिछले तीन वर्षों से प्राकृतिक खेती के विभिन्न सिद्धांतों पर शोध एवं प्रदर्शन कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती में गौ आधारित कृषि व्यवस्था की महत्वपूर्ण भूमिका है। गाय से प्राप्त गोबर एवं गोमूत्र का उपयोग कर जैविक उत्पाद तैयार करने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति को कम किया जाता है और खेती की लागत को कम किया जाता है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती से कम लागत में गुणवत्ता पूर्ण एवं सुरक्षित उत्पाद प्राप्त किया जा सकता है। वर्तमान समय में भूमि की विविधता और उत्पादन लागत को देखते हुए प्राकृतिक खेती एक प्रभावशाली विकल्प के रूप में उभर रही है।उप-चिकित्सक कृषि  मोनेश भंडारी ने बताया कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य किसानों को जैविक, प्राकृतिक एवं कृषि के प्रति प्रेरित करना है। उन्होंने कहा कि जिले में एक जून से 30 जून तक ”खेत बचाओ अभियान” चलाया जा रहा है, जिसके तहत किसानों को मानक उपयोग, स्वास्थ्य संरक्षण और हरित खाद के महत्व की जानकारी दी जा रही है। अभियान के तहत किसानों को हरित खाद एवं दलहनी बीजा के नमूनों के उपयोग के संबंध में भी सलाह दी जा रही है।कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष  अरुण सार्वा, फ़्लॉसी वर्ग आयोग के अध्यक्ष  नेहरू निषाद, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती अंगिरा ध्रुव, श्रीमती लक्ष्मी साहू,  बालाराम साहूकार, वरिष्ठ किसान एवं कृषि विशेषज्ञ  प्रताप राव कृदत्त, किसान नेता  ठाकुर राम वर्मा,  शशि साहू सहित कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, वरिष्ठ किसान एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन शामिल हैं।कार्यक्रम के दौरान जिला किसान मोर्चा के अध्यक्ष  रोहिताश मिश्रा ने किसानों को प्राकृतिक, विषमुक्त एवं जहरमुक्त खेती निषेध की शपथ दिलाई। कृषि विशेषज्ञों द्वारा प्राकृतिक खेती के उद्योग, जैविक खाद निर्माण, जीवामृत एवं बीजामृत के उपयोग तथा कृषि लागत में कमी के उपाय पर विस्तृत जानकारी दी गई। किसानों ने प्राकृतिक खेती से जुड़े नवाचारों के सफल एवं प्रयोगों की जानकारी प्राप्त की। मंत्री श्री वर्मा को स्मृति चिन्ह में किसान हल का दर्जा प्राप्त हैकार्यक्रम में किसानों ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और रासायनिक खेती पर उद्यम कम करने का संकल्प लेते हुए किसानी कृषि प्रणाली को विस्तार राजस्व एवं जिला प्रभारी मंत्री श्री टंकराम वर्मा ने प्राकृतिक खेती को स्वस्थ, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत का आधार बतायासंबलपुर में आयोजित प्राकृतिक कृषि आश्रम एवं कृषि मेले में किसानों की बैठक आयोजित की गईआमदी में सरस्वती शिशु मंदिर भवन और संबलपुर में किसान कुटी निर्माण के लिए 10-10 लाख रुपये की घोषणा