हेम नारायण और ओंकार साहूकारों के प्राचीन भूमि अभिलेखों में सुधार हुआ
राजस्व समीक्षा अब आद्योपांत के बंद, कोर्ट लिंक से बच रहा समय और धन
धमतरी – धमतरी जिला प्रशासन की नवीन पहल ‘लिंक कोर्ट’ में राहत और डूबान प्रभावित क्षेत्रों के लिए राहत का बड़ा माध्यम उभर रहा है। कभी-कभी छोटे-छोटे राजस्व मामलों के लिए कई किलोमीटर की यात्रा कर तहसील या जिला मुख्यालय तक पहुंच कर मजबूर ग्रामीण अब अपने ही गांव में अंतिम लाभ और समाधान पा रहे हैं।
राज्य शासन के फार्मासिस्टों के एसोसिएट्स मजिस्ट्रेट श्री अविनाश मिश्रा के निर्देशन में जिलों के दुर्गम क्षेत्र में कोर्ट की लिंक की शुरुआत की गई। विकासखंड नगरी के बोरई और विकासखंड धमतरी के अकलाडोंगरी में संचालित ये लिंक कोर्ट स्टूडियो को पुनर्जीवित करने के लिए उनके घर के अंत में उपलब्ध कराए जा रहे हैं। गुरुवार को अकलाडोंगरी कोर्ट लिंक के निरीक्षण के दौरान न्यायाधीश श्री मिश्रा ने स्वयं शिष्या से चर्चा कर मित्रता का मंचन किया और प्रकरणों का प्रक्रियात्मक अवलोकन किया।
कलेक्टर श्री मिश्रा ने कहा कि क्षेत्र के नागरिकों को राहत और डूबान से प्रभावित क्षेत्र में राजस्व सेवाओं की सहजता सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता है। कोर्ट के लिंक के माध्यम से नामांतरण, सीमांकन, खाताविभाजन और अभिलेख सुधार जैसे मामलों का सहयोग किया जा रहा है, जिससे लोगों को अलौकिक भागदौड़ से मुक्ति मिल गई है।
न्यायालय लिंक की समीक्षा उस समय और स्पष्ट हुई जब ग्राम तानसी निवासी हेमनारायण बजरंग से जुड़े एक जटिल नामांतरण प्रकरण का समाधान स्थानीय स्तर पर किया गया। भूमि अभिलेखों में दर्ज अनेक हितबद्ध पक्षकारों के बयान और आवश्यक अवशेष गांव में ही पूरी तरह से पढ़ें। पहले ऐसे मामलों में बार-बार तहसील कार्यालय देखा जाता था, लेकिन अब पूरी तरह से असेसमेंट की सुविधा के लिए सोमाली मशीनरी हो रही है।
इसी प्रकार ग्राम अकलाडोंगरी के ओंकार साहूकारों के वर्षों पुराने भूमि अभिलेखों के सुधार का मामला भी लिंक अदालत के माध्यम से सुलझाया गया। वर्ष 2011 में भूमि का नामांतरण विभिन्न पदों से किया गया। कोर्ट लिंक में सभी सितारों की सूची कर राजस्व अभिलेखों में आवश्यक सुधार किया गया और रजिस्ट्रार श्री मिश्रा ने स्वयं सुधार पत्र को अलग कर दिया।
आज की कार्रवाई में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि 12 हिटबाइड पक्षकारों वाले एवं कॉम्प्लेक्स क्लासिक नाम रूपांतरण प्रकरण का स्थानीय स्तर पर समाधान हो रहा है। सभी पक्षों के बयान पर तर्क दिया गया, जिससे वर्षों से अंतिम प्रक्रिया को गति मिल गई और शीघ्र ही किसानों का मार्ग समाप्त हो गया।
कोर्ट लिंक केवल राजस्व मसलों के समाधान का मंच नहीं है, बल्कि सुशासन की उस विचारधारा का उदाहरण है जिसमें प्रशासन स्वयं नागरिकों को अपनी समस्याओं का समाधान करने के लिए नियुक्त करता है। इस समय, श्रम और आर्थिक खर्च में कमी आ रही है, वहीं प्रशासन के प्रति उनका विश्वास भी मजबूत हो रहा है।
हर गुरुवार को अकलाडोंगरी और हर शुक्रवार को बोराई में नियमित रूप से आयोजित किया जाता है, लिंक कोर्ट को अब फिर से खोलने के लिए न्याय और सुविधा के नए केंद्र बनाए गए हैं। गांव में ही सबसे बड़ी सूची और सरल प्रक्रिया से अंतिम संस्कार के लिए जिला प्रशासन की ओर से इस जनोमुखी पहल की नियुक्ति की गई, जिसमें कलेक्टर श्री अविनाश मिश्रा की प्रति नियुक्ति की गई।
अन्य क्षेत्रीय प्रशासन में यह स्पष्ट संदेश दिया जाता है कि जब शासन और प्रशासन जनसरोकारों को केंद्र में नियुक्त किया जाता है, तब न्याय और धर्म केवल लोकतंत्र तक सीमित नहीं होते, बल्कि लोगों के घर-आँगन तक होते हैं। यही सुशासन की असली पहचान है।
