विकासखंड: सरायपाली-सरायपाली और नवनिर्मित जिला सारंगढ़-बिलाइगढ़ को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग (NH-53 से जुड़े हिस्से) पर स्थित ग्राम पंचायत बोडेसरा में इन दिनों राहगीरों और स्थानीय ग्रामीणों का जीना मुहाल हो गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग और मुख्य सड़कों के निर्माण व मरम्मत कार्य में लगी एजेंसी की घोर लापरवाही के कारण करीब 1 किलोमीटर के दायरे में सुबह से लेकर रात तक सिर्फ धूल का गुबार उड़ता दिखाई दे रहा है।भारी वाहनों की आवाजाही और कच्चे पड़े रास्ते की वजह से स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि दिन के उजाले में भी सड़कों पर दृश्यता (Visibility) शून्य के बराबर हो जाती है। इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग और सड़क निर्माण कंपनी इस गंभीर समस्या पर आंखें मूंदे बैठे हैं।
प्रमुख समस्याएं और जनता की परेशानी
* थमी वाहनों की रफ्तार, हादसों का डर: धूल के इस बवंडर के कारण सामने से आ रहे वाहन चालकों को कुछ भी दिखाई नहीं देता। विशेषकर दोपहिया वाहन चालक अपनी जान जोखिम में डालकर इस 1 किलोमीटर के हिस्से को पार कर रहे हैं, जिससे यहाँ रोजाना गंभीर सड़क हादसों की आशंका बनी रहती है।
* सांस के मरीजों की बढ़ी संख्या: बोडेसरा और आसपास के ग्रामीणों का कहना है कि हवा में चौबीसों घंटे धूल घुली होने के कारण बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा के मरीजों को सांस लेने में भारी तकलीफ हो रही है। लोग अपने घरों के दरवाजे और खिड़कियां तक खोलने को मजबूर हैं।
नियमों की सरेआम धज्जियां
नियमानुसार किसी भी व्यस्त या निर्माणाधीन सड़क पर उड़ती धूल को रोकने के लिए निर्माण एजेंसी द्वारा दिन में कम से कम 3 से 4 बार पानी का छिड़काव (Water Sprinkling) किया जाना अनिवार्य है। लेकिन ग्राम पंचायत बोडेसरा के इस प्रभावित क्षेत्र में हफ्तों से पानी की एक बूंद भी नहीं छिड़की गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार और संबंधित अधिकारी केवल अपनी जेबें भरने में व्यस्त हैं और आम जनता की सुरक्षा व स्वास्थ्य से सरेआम खिलवाड़ किया जा रहा है।
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