( सीएसआर के तहत दुकानों और देवगुड़ी का लोकार्पण )
किरंदुल — दंतेवाड़ा जिले के कुआकोंडा ब्लॉक के ग्राम कलेपाल व आसपास के ग्रामीणों को सामान खरीदने या बेचने के लिए अब 12 किमी दूर किरंदुल का चक्कर नही लगाना पड़ेगा। उनकी जरूरतों का सामान उनके गांव की ही दुकानों पर ही उपलब्ध होगा। नवरत्न कंपनी एनएमडीसी की कोशिशों से यह संभव हुआ है। अपने निगमित सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत कंपनी द्वारा स्थानीय ग्रामीणों की सहूलत एवं उनकी आय में बढ़ोत्तरी के लिए विभिन्न गांवों में शॉपिंग सेंटर्स का विकास किया जा रहा है। इसी कड़ी में कलेपाल की तीन दुकानों का लोकार्पण शुक्रवार को कंपनी के अधिशासी निदेशक एवं किरंदुल परियोजना के प्रमुख रबींद्र नारायण ने किया। इस दौरान जिला पंचायत सदस्य, सरपंच समेत अन्य गणमान्य नागरिक भी मौजूद रहे। इस अवसर पर अपने संबोधन में बतौर मुख्य अतिथि नारायण ने कहा कि सीएसआर के तहत एनएमडीसी ने स्थानीय ग्रामीणों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। खासतौर पर महिला स्वावलंबी समूहों के माध्यम से लोगों का जीवन स्तर उठाने की पहल की जा रही हैं। उन्होंने लोगों से वनोपज के साथ ही अन्य नगदी फसलों के जरिये अपनी आय बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि एनएमडीसी में हमारी कोशिश आप सभी के चेहरे पर मुस्कान देखने की है, इसके लिए हर संभव सहयोग किया जाएगा।
इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्य सोमारू कड़ती ने गांव के मेधावी बच्चों का उल्लेख करते हुए स्कूली शिक्षा को अधिक बेहतर बनाने पर जोर दिया। सीएसआर के तहत कंपनी द्वारा बनवाई गयीं दुकानों के लिए भी उन्होंने कंपनी प्रबंधन का आभार जताया। कलेपाल में दुकानें बनने से चोलनार, टिकनपाल, पालनार, गुमियापाल आदि क्षेत्रों के ग्रामीणों को भी लाभ मिलेगा।
इस अवसर पर एनएमडीसी की ओर से उप महाप्रबंधक (एचआर) के एल नागवेणी, कलेपाल सरपंच भीमे गावड़े समेत बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं स्थानीय लोग मौजूद रहे।
*सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक देवगुड़ी*
कलेपाल गांव में ही एनएमडीसी द्वारा सीएसआर के तहत देवगुड़ी का निर्माण भी कराया गया है। इसके लिए ग्रामीणों ने कंपनी अधिकारियों का विशेष तौर पर धन्यवाद दिया। कई जनप्रतिनिधियों ने अपने संबोधन में देवगुड़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बताते हुए कहा कि एनएमडीसी किरंदुल के अधिकारियों की कोशिशों से उनकी आस्था का सम्मान बढ़ा है। भविष्य में गांव के मेला जात्रा समेत अन्य सामाजिक सांस्कृतिक आयोजनों में सुविधा रहेगी।
