“नई सुबह की ओर” अभियान से मिली दिशा, खस-ब्राह्मी की खेती से पौध आय की संभावना
धमतरी – नक्सल प्रभावित जंगल के आबंटन क्षेत्र के किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। मेडिसिन पैडप बोर्ड रायपुर द्वारा 02 मई को नारायणपुर जिले के 50 से अधिक युवा किसानों के लिए धमतरी जिले में अध्ययन यात्रा सह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।इस कार्यक्रम के तहत कोहकामेटा, कुरुषनार, कंदाड़ी, किहकड़, ओली और बासिंग गांव के किसानों को औषधीय एवं उन्नत खेती की उन्नत खेती से संबंधित कोड का प्रशिक्षण दिया गया। किसानों ने महिला स्व-लैंग्वेज सोसायटी द्वारा की जा रही खास, ब्राह्मी और खेती की खेती का अवलोकन कर समसामयिक जानकारी प्राप्त की।
“नई सुबह की ओर” अभियान से मिली नई दिशा
यह कार्यक्रम “नई सुबह की ओर” अभियान के तहत आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और उन्हें बाजार में मांग वाली कंपनियों की ओर प्रेरित करना है। इस पहल के माध्यम से कौशल विकास और आय वृद्धि पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
कंडेल में ब्राह्मी खेती का मिश्रित प्रशिक्षण
अध्ययन यात्रा के दौरान किसानों को ग्राम कंडेल में ब्राह्मी की खेती का व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया गया। जिला सलाहकार फकीरचंद कोसरिया ने खेत की तैयारी, लोन, सीलन, क्रैन्डी प्रबंधन और विपणन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं।
महिला स्व-सहायता समूह की सदस्या सत्या धीमर ने मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षण देते हुए बताया कि पारंपरिक धान की तुलना में खस, ब्राह्मी और बछड़े की खेती से दोहरी कमाई मिल रही है। उन्होंने बताया कि इन उद्यमों में लागत कम होती है और एक बार के सोलोमन्स को 3-4 साल बाद प्राप्त किया जा सकता है।
मदरहौद में खास की खेती का विवरण
किसानों को ग्राममहारौद में खास की खेती का निरीक्षण किया गया। यहां बताया गया है कि खास की बाजार में भारी मांग है और इसे नदी-नालों के किनारे से आसानी से खरीदा जा सकता है। धमतरी मॉडल को लेआउट में नापसंद की भी चर्चा हुई।
मुफ़्त प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता
किसानों को दी गई जानकारी दवा पैडप बोर्ड द्वारा प्रशिक्षण और उपकरण निःशुल्क उपलब्ध हैं। साथ ही किशोरी के साथ अनुबंध के माध्यम से एडवांस रस्क आर्थिक सहायता भी प्रदान की जाती है।
नई उम्मीदों के साथ किसान
इस अध्ययन यात्रा के बाद अजीजमाड़ की औषधीय खेती को लेकर काफी उत्सुकता देखने को मिली। जो किसान अब तक विकास के बुनियादी ढांचे से दूर थे, वे अब अपने परामर्श में इन दवाओं को व्यसन के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
तीन गुना आय वृद्धि का लक्ष्य
बोर्ड के सीईओ जे.एस.सी.एस. राव ने बताया कि वन्यजीवों के लिए सर्वश्रेष्ठ में इस प्रकार का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। उन्होंने कहा कि औषध विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की खेती के माध्यम से किसानों की आय दो से तीन गुना तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
