बीजापुर के जंगलों में “ग्रीन नरसंहार” का बड़ा खुलासा: 1000 करोड़ से ज्यादा का नुकसान, वनमण्डलाधिकारी की कार्यशैली ही कटघरे में.
*ईश्वर सोनी बीजापुर*
बीजापुर के जंगलों में जारी अंधाधुंध कटाई और अवैध दोहन ने अब भयावह रूप ले लिया है।
ताजा आंकड़ों और स्थानीय दावों के अनुसार, वन विभाग को अब तक 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हो चुका है। यह नुकसान सिर्फ पेड़ों की कटाई तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को झकझोर देने वाला है।
प्रदेश के वन मंत्री केदार कश्यप के प्रभारी क्षेत्र में ही यह हालात होना सरकार और प्रशासन दोनों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
*💥 “विकास” के नाम पर जंगल साफ!*
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना(PMGSY) और अन्य निर्माण कार्यों के नाम पर
हजारों पेड़ों की सफाया, भारी मशीनों से जंगलों की खुदाई
बड़े-बड़े गड्ढों से भूमि को बर्बाद किया जा रहा है
सागौन जैसे कीमती वृक्षों का बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है, जिससे वन विभाग को सीधा आर्थिक और पर्यावरणीय झटका लगा है।
*🔥 वनमण्डलाधिकारी पर सीधा आरोप*
इस पूरे मामले में सबसे बड़ी भूमिका वनमण्डलाधिकारी (DFO) की मानी जा रही है।
👉 क्या इतनी बड़ी क्षति बिना DFO की जानकारी के संभव है?
👉 क्या अधिकारियों ने जानबूझकर आंखें मूंद लीं?
👉 क्या ठेकेदारों और एजेंसियों को नियम तोड़ने की खुली छूट दी गई?
स्थानीय लोगों का साफ कहना है कि
“अगर वनमण्डलाधिकारी सख्त होते, तो एक भी पेड़ अवैध नहीं कटता।”
*⚠️ तस्करों की एंट्री, विभाग गायब*
हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि
तेलंगाना के तस्कर खुलेआम सक्रिय हैं
रात में सागौन और अन्य बहुमूल्य लकड़ियों की तस्करी
विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं
यह स्थिति विभाग की कार्यशैली पर गंभीर संदेह पैदा करती है।
*❗ वनमंत्री की चुप्पी पर सवाल*
वन मंत्री केदार कश्यप की चुप्पी अब सवालों के घेरे में है।
👉 क्या उन्हें पूरे मामले की जानकारी नहीं?
👉 या फिर अधिकारियों को खुली छूट मिली हुई है?
👉 क्या 1000 करोड़ के नुकसान पर भी जवाबदेही तय नहीं होगी?
🌿 जंगल खत्म, भविष्य खतरे में
ग्रामीणों के अनुसार, जंगल सिर्फ पेड़ नहीं बल्कि जीवन का आधार हैं।
लेकिन जिस तेजी से विनाश हो रहा है, उससे
जल संकट बढ़ेगा
वन्यजीवों का अस्तित्व खतरे में आएगा
आदिवासी आजीविका पर सीधा असर पड़ेगा
*📢 अब आर-पार की लड़ाई*
बीजापुर में हो रहे इस “ग्रीन नरसंहार” ने साफ कर दिया है कि
वन विभाग पूरी तरह फेल नजर आ रहा है
वन को बचाने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका जांच के दायरे में आनी चाहिए
1000 करोड़ से ज्यादा के नुकसान की जवाबदेही तय होनी चाहिए
अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह सिर्फ एक घोटाला नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के साथ अन्याय होगा.
