वनविभाग की नाकामी से बीजापुर के जंगलों मे ‘ग्रीन नरसंहार’!

1000 करोड़ से ज्यादा का जंगल नष्ट , वनों को बचाने में वनविभाग नाकाम या मिलीभगत

बीजापुर में मशीनों ने निगले जंगल, आग और कुल्हाड़ियों से तबाही का खुला खेल

PMGSY के सड़को के नाम पर उजाड़े गए लाखों पेड़, इस बीच तेलंगाना के तस्करों का नेटवर्क सक्रिय

 ईश्वर सोनी, बीजापुर

बीजापुर के घने जंगल आज एक सुनियोजित विनाश के शिकार बन चुके हैं।

यह कोई सामान्य कटाई नहीं, बल्कि मशीन, कुल्हाड़ी और आग के जरिए चल रहा संगठित “ग्रीन नरसंहार” है, जिसने हजारों हेक्टेयर वन क्षेत्र को तबाह कर दिया है।

प्रारंभिक आकलन में 1000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान, लेकिन जिम्मेदार वन विभाग की भूमिका संदेह के घेरे में है—कार्रवाई शून्य, जवाब नदारद।

*🌳 विकास या विनाश? PMGSY सड़कों ने निगले जंगल*

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत बन रही सड़कों ने बीजापुर के जंगलों को चीर कर रख दिया है।

सड़कों के दोनों ओर 100 मीटर तक बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई

भारी मशीनों से जड़ों समेत उखाड़े गए हजारों पेड़

पर्यावरणीय नियमों की खुलेआम अनदेखी

*सबसे बड़ा सवाल:*

👉 क्या इन परियोजनाओं के लिए वैधानिक अनुमति ली गई थी?

👉 अगर ली गई, तो इतनी अंधाधुंध कटाई कैसे हुई?

बताया जा रहा है कि PMGSY की सड़कों के लिए नियमतः ग्राम सभा से प्रस्ताव पास कराकर सड़क में आ रहे पेड़ो सहित दोनो तरफ चार मीटर के पेड़ों की कटाई की अनुमति ली जानी थी लेकिन PMGSY के अधिकारी एंव ठेकेदारों ने बिना कोई अनुमति लिए सड़क के दोनो तरफ लगभग 20 से 100 मीटर तक के पेड़ों को मशीनों से उखाड़ दिए

*🪓 सागौन तस्करों का साम्राज्य — जंगल से सीधे तेलंगाना तक सप्लाई*

बीजापुर के जंगल अब तस्करों के लिए “ओपन मार्केट” बन चुके हैं।

👉 सागौन सहित कीमती लकड़ियों की खुलेआम कटाई

👉 रात के अंधेरे में नहीं, बल्कि दिनदहाड़े परिवहन

👉 लकड़ी सीधे तेलंगाना तक तस्करी

वन विभाग की चुप्पी इस पूरे नेटवर्क पर मिलीभगत की आशंका को मजबूत करती है।

*जंगल मे लग रही आग को रोकने में वनविभाग नाकाम*

जंगलों में लगाई जा रही आग अब बड़े सवाल खड़े कर रही है

जंगलों में लगी आग से 1 लाख से अधिक छोटे पौधे जलकर खत्म , वनविभाग आग को बुझाने में अब तक नाकाम साबित हुई है जबकि वनों की रक्षा एंव प्रचार – प्रसार के लिए सरकार से लाखों का बजट आता है लेकिन सब कुछ सिर्फ कागजो में होता है

एक तरफ सरकार और वन विभाग जंगल बचाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च होने का दावा करता है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी सच्चाई यह है कि गर्मी में जंगल धू-धू कर जल रहे हैं , एक तरफ जंगल जल रहे है वन्ही दूसरी तरफ जंगल मे बेशकीमती पेड़ो पर PMGSY की दैत्याकार मशीन एंव आरी चल रही है जिसे रोकने में विभाग नाकाम साबित हो रहा है अब तक बीजापुर के जंगलों में 1000 करोड़ से ज्यादा का नुकसान पेड़ो को उखाड़ने एंव आगजनी से होने का दावा सूत्र कर रहे है

*वन विभाग का फायर बजट*

 

💸 30 से 80 करोड़ का बजट… फिर भी आग पर काबू नहीं!

सूत्रों के अनुसार बीजापुर जिले में हर साल

👉 करीब 30 से 80 करोड़ रुपये वन संरक्षण और प्रबंधन के नाम पर आते हैं

जिसमें शामिल हैं:

CAMPA फंड

फायर मैनेजमेंट योजना

राज्य वन विभाग बजट

👉 छत्तीसगढ़ सरकार अलग से बजट देती है

काम:

फायर सीजन (फरवरी–जून) में विशेष अभियान

अस्थायी कर्मचारियों की भर्ती

पेट्रोलिंग

📊 हर साल करोड़ों रुपये इस पर खर्च होते हैं , पर ये राशि भरस्टाचार के भेंट चढ़ जाती है एंव वनों को लगातार नुकसान बरकरार है

*Forest Fire Prevention and Management Scheme (FPM Scheme)*

👉 यह केंद्र सरकार की सबसे मुख्य योजना है

क्या होता है इसमें:

फायर लाइन (जंगल में खाली पट्टी बनाना)

फायर वॉचर (निगरानी कर्मचारी)

कंट्रोल रूम और अलर्ट सिस्टम

उपकरण: ब्लोअर, फायर बीटर, टैंकर

*🗣️ एक जिम्मेदार अधिकारी ने (नाम न छापने की शर्त पर) कहा कि*👉 मीडिया में चल रही खबर सही है

“स्थिति पूरी तरह नियंत्रण से बाहर जा चुकी है” , वनमण्डलाधिकारी की कार्यशैली पर ही सन्देह होता है , साहब सिर्फ कागजी विकास की परिकल्पना में लगे है , धरातल से कोषों दूर है ऐसे में बेशकीमती जंगल कैसे बचेगा

*🚛 कटे पेड़ों पर भी डाका — ठेकेदारों की खुली लूट*

👉 कटे हुए पेड़ों को वन डिपो तक नहीं पहुंचाया जा रहा

👉 ठेकेदार खुद ही लकड़ी गायब कर रहे

👉 जंगल से सीधे तस्करी नेटवर्क तक सप्लाई

यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि संगठित आर्थिक अपराध की ओर इशारा करता है।

*🌡️ बदलता बीजापुर — जंगल उजड़े, मौसम बदला*

स्थानीय लोगों के अनुसार—

पहले घने जंगलों से तापमान नियंत्रित रहता था पर अब लगातार वनों के उजड़ने से गर्मी बढ़ गई है अब गर्मी 40 से 50 डिग्री तक पहुंच रही

वन्ही बारिश में भी लगातार गिरावट हो रही है

* *क्या यह आने वाले पर्यावरणीय संकट की चेतावनी नहीं है?*

 *वन्यजीवों पर भी मंडराया खतरा* 

जंगल खत्म होने से शिकारियों के लिए आसान हो गया है और वो लगातार जंगली जानवरों को निशाना बनाते हुए शिकार कर रहे है

*जैव विविधता पर गंभीर संकट*

*❗ सीधा सवाल, सीधी जिम्मेदारी*

👉 1000 करोड़ के इस नुकसान का जिम्मेदार कौन?

👉 क्या वन विभाग सिर्फ कागजों में ही “संरक्षण” करेगा?

👉 क्या सरकार इस मामले में उच्च स्तरीय जांच कराएगी?

👉 या फिर जंगलों का यह नरसंहार यूं ही जारी रहेगा?

*लगातार मीडिया में खबरों के बाद जागा विभाग* 

Sdo ने कहा कि जंगल मे हुए नुकसान का आंकलन किया जा रहा है एंव PMGSY से पत्रचारी जारी है जो भी नुकसान हुआ है उसकी भरपाई PMGSY से की जाएगी