अधिकारियों को अवैध कब्जों पर कार्रवाई और योजनाओं के क्रियान्वयन में प्रगति लाने के दिए निर्देश

कलेक्टर ने समय-सीमा बैठक में विभागीय कार्यों की समीक्षा

कैच द रेन, पीएम जनमन, संपूर्णता अभियान सहित सभी प्राथमिकताओं पर जोर

गरियाबंद – कलेक्टर श्री बीएस उइके ने आज जिला कार्यालय के सभाकक्ष में समय-सीमा की बैठक लेकर विभागीय कार्यों की विस्तारपूर्वक समीक्षा की। इस दौरान जिला पंचायत के मुख्य कार्यकारी अधिकारी  प्रखर चंद्राकर, अपर कलेक्टर  पंकज डाहिरे सहित सभी विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। कलेक्टर ने अधिकारियों को शासन की प्राथमिकताओं और जनकल्याणकारी योजनाओं के सुचारू क्रियान्वयन के लिए विभागीय समन्वय करते हुए कार्य करने को कहा।

कलेक्टर ने ई-ऑफिस, ई-एचआरएमएस और स्पैरो पोर्टल की प्रगति की विस्तृत समीक्षा करते हुए अधिकारियों को इन सभी ऑनलाइन प्रणालियों के शत-प्रतिशत उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी अधिकारियों से कहा कि सभी फाइलों का समयबद्ध निपटान ई-ऑफिस के माध्यम से ही किया जाए। ई-एचआरएमएस में कर्मचारियों से संबंधित डाटा को अद्यतन करने पर जोर दिया गया। स्पैरो पोर्टल में लंबित एपीएआर शीघ्र पूरा करने के निर्देश भी दिए गए।

श्री उइके ने सभी विभागों को निर्देशित किया कि लंबित प्रकरणों को समय पर प्रस्तुत करें। जिससे प्रशासनिक कार्यों की पारदर्शिता बनी रहे। सभी शिक्षकों का अद्यतन विवरण सत्यापन के साथ पोर्टल पर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए। इस दौरान मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को दूरस्थ अंचलों में रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्ति करने के निर्देश दिए। जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हो सके।

कलेक्टर ने शासकीय जमीन पर अवैध कब्जे कर मकान बनाने वाले के खिलाफ नोटिस जारी कर कानूनी कार्रवाई करें। इसी तरह शासकीय कर्मचारियों द्वारा अवैध निर्माण या कब्जे की स्थिति में भी नोटिस देकर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें। उन्होंने ’कैच द रेन’ अभियान के तहत वर्षाजल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण और अधिक करने पर जोर दिया। बैठक में छुटे हुए विद्यालयीन बच्चों का आधार, अपार आईडी शीघ्र बनाने, पीएम जनमन योजना के अंतर्गत निर्माणाधीन स्कूल, आंगनबाड़ी, सड़क एवं अन्य अधोसंरचना कार्यों को निर्धारित समय में पूर्ण करने के निर्देश दिए।

कलेक्टर ने ग्राम पंचायत सचिव, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी और पटवारी अपने-अपने पंचायत क्षेत्रों में सप्ताह में कम से कम तीन दिन अनिवार्य रूप से बैठें, जिससे ग्रामीणों की समस्याओं का त्वरित निराकरण हो सके। उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।