फिंगेश्वर:– नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित उल्लास महापरीक्षा में जिले के पांचो विकासखंडो में 22 मार्च 2026 को राष्ट्रव्यापी बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान मूल्यांकन परीक्षा का आयोजन राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण रायपुर द्वारा दिए गए दिशा निर्देश के अनुरूप कराया गया. इस महत्वपूर्ण आयोजन को सफल बनाने में जिला कलेक्टर भगवान सिंह उइके के निर्देशन, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत गरियाबंद प्रखर चंद्राकर,एवं जिला शिक्षा अधिकारी जगजीत सिंह धीर के मार्गदर्शन एवं जिला परियोजना अधिकारी बुद्धविलास सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही. महापरीक्षा अभियान में कुल 7590 शिक्षार्थियों का पंजीयन कराया गया जिसमें से 4000 शिक्षार्थियों ने गरियाबंद अंतर्गत बनाए गए कुल 221 परीक्षा केदो में परीक्षा दिलाया. वहीं उपजेल गरियाबंद में महापरीक्षा अभियान अंतर्गत कुल 7 पंजीकृत शिक्षार्थियों में 07 सम्मिलित हुए. साथ ही किसान पारा स्कूल गरियाबंद में आत्मसमर्पित 11 नक्सलियों ने भी महापरीक्षा अभियान में भाग लिया एवं परीक्षा दिलाकर साक्षर बनने हेतु एक कदम बढ़ाया. जिला परियोजना अधिकारी बुद्ध विलास सिंह ने बताया कि यह परीक्षा रविवार को सुबह 10:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक आयोजित की गई.इस बार साक्षरता विभाग द्वारा परीक्षा के माध्यम से जेल के कैदियों एवं आत्मसमर्पित नक्सलियों ने शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने एवं उन्हें साक्षर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई. उन्होंने आगे बताया कि इस प्रकार की प्रयास बंदियों एवं आत्म समर्पित नक्सलियों के पुनर्वास एवं समाज के मुख्य धारा से जोड़ने में सहायक सिद्ध होंगे. जिला शिक्षा अधिकारी जगजीत सिंह कहा कि उल्लास नवभारत साक्षरता परीक्षा न केवल साक्षरता दर बढ़ाने में सहायक होती है बल्कि लोगों में आत्मविश्वास भी विकसित करती है. प्रशासन का लक्ष्य है कि जिले के प्रत्येक व्यक्ति को साक्षर बनाकर उसे मुख्य धारा से जोड़ा जाए.उल्लास महापरीक्षा का सफल आयोजन जिले में साक्षरता अभियान को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है जिससे आने वाले समय में शिक्षा के क्षेत्र में और बेहतर परिणाम मिलने की उम्मीद है. कार्यक्रम को सफल बनाने में जिला शिक्षा अधिकारी जगजीत सिंह धीर, जिला परियोजना अधिकारी बुद्ध विलास सिंह जिला मिशन समन्वयक शिवेश शुक्ला, विकासखंड शिक्षा अधिकारी गजेंद्र ध्रुव सहित जिले की पांचो विकासखंड शिक्षा अधिकारी, बी आर सी,संकुल प्राचार्य, संकुल समन्वयको एवं शिक्षकों का सराहनीय योगदान रहा.
