धमतरी -जिले के कुरूद विकासखंड के ग्राम खर्रा की निवासी जानकी की जीवन यात्रा महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की प्रेरक कहानी बन गई है। कभी एक साधारण गृहिणी के रूप में खेती-बाड़ी में परिवार का सहयोग करने वाली जानकी आज सफल व्यवसायी के रूप में पहचान बना चुकी हैं। उनकी यह सफलता ग्रामीण आजीविका मिशन की बिहान योजना से मिली प्रेरणा, मार्गदर्शन और निरंतर मेहनत का परिणाम है।
जानकी जय मां गायत्री महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद आर्थिक गतिविधियों के बारे में जागरूक हुईं। समूह के माध्यम से उन्हें बचत, बैंकिंग और स्वरोजगार के अवसरों की जानकारी मिली। सामुदायिक निवेश निधि (CIF) से प्राप्त ऋण की मदद से उन्होंने कपड़ा व्यवसाय की शुरुआत की। मेहनत, लगन और ग्राहकों के विश्वास से उनका व्यवसाय धीरे-धीरे बढ़ता गया।
समूह के बैंक लिंकेज के माध्यम से अतिरिक्त ऋण प्राप्त कर उन्होंने अपने व्यवसाय का विस्तार करते हुए फैंसी स्टोर भी शुरू किया। बाद में मुद्रा योजना के तहत ऋण लेकर उन्होंने जूते-चप्पल की दुकान भी प्रारंभ की। आज उनके व्यवसाय में कपड़े, फैंसी सामग्री और जूते-चप्पल की बिक्री होती है, जिससे उन्हें प्रतिमाह अच्छी आमदनी प्राप्त हो रही है और उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।
जानकी केवल स्वयं आत्मनिर्भर नहीं बनीं, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा स्रोत बन गई हैं। वे खेती-बाड़ी समूह की अध्यक्ष, ग्राम संगठन (VO) की अध्यक्ष तथा बीआरसी सदस्य के रूप में सक्रिय भूमिका निभाते हुए महिलाओं को बचत, स्वरोजगार और उद्यमिता के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनके प्रयासों से कई महिलाएं स्व-सहायता समूहों से जुड़कर आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी कर रही हैं।
जानकी बताती हैं कि समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आत्मविश्वास मिला और सरकारी योजनाओं की जानकारी भी प्राप्त हुई। इसी मार्गदर्शन और सहयोग के कारण वे आज सफलतापूर्वक अपना व्यवसाय संचालित कर रही हैं।
आज जानकी की सफलता यह साबित करती है कि यदि महिलाओं को सही अवसर, प्रशिक्षण और सहयोग मिले तो वे न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधार सकती हैं, बल्कि पूरे समाज में सकारात्मक बदलाव की मिसाल भी बन सकती हैं।
