प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और सरकारी सहायता से लाख पालक किसानों की आय में वृद्धि हुई
कांकेर – कभी माओवाद प्रभाव के कारण विकास से वनांचल आज सकारात्मक परिवर्तन का उदाहरण बन रहा है। पहले यहां किसान मुख्यत: धान की खेती पर प्रतिबंध थे, लेकिन अब शासन की पहल और वन विभाग के मार्गदर्शन से किसान लाख उत्पादन को अपनाकर अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं। वनमंडल पश्चिम भानुप्रतापपुर, कोयलीबेड़ा विकासखण्ड के किसानों को लाख का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, इसके लिए जिला खनिज न्यास के तहत आदर्श लाख संचालन परियोजना का संस्करण मिला है। इस महत्वपूर्णकांक्षी परियोजना का वैज्ञानिक कोयलीबेड़ा विकासखंड के 06 आतंकवादियों में शामिल किया जा रहा है, इनमें वन परिक्षेत्र कोयलीबेड़ा के 05 आरक्षण क्रमशः कोयलीबेड़ा, कोतुल, चारगांव, मन्हाकाल पानीडोबीर और पश्चिम परकोटा के 01 आरक्षित छोटेबेठिया को शामिल किया गया है। इनमें सभी 06 मछुआरों के 621 किसानों के मार्गदर्शन एवं भाठा जमीन में लगभग 4559 कुसुम के वृक्ष मौजूद हैं, इसके अलावा बेर एवं पलाश के उपाय भी हैं, जिनमें एक लाख का कार्य किया जा सकता है। वर्तमान में कुसुम वृक्षों में ब्लेजिंग, मार्किंग एवं शाखा कटिंग-छंटाई का कार्य जारी है। लाख पालन के लिए किसानों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, इसके लिए कोयलीबेड़ा विकासखंड के सुदूर वनांचल के ग्राम पंचायत छोटेबोडेली के किशोर ग्राम मानकाल में विद्यालय सह प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के मुख्य अतिथि स्थानीय मठाधीश श्री विक्रमदेव मंदिर थे और राष्ट्रपति लच्छूराम गावड़े के थे। कार्यक्रम में जिला अध्यक्ष कोयलीबेड़ा श्रीमती श्यामबती मंडावी, जिला वनोपज सहयोगी संघ पश्चिम भानुप्रतापपुर वनमंडल के अध्यक्ष सुकलाल देहारी, वन विभाग के संगठन आर.एन. शोरी, एम.एस.सी. नाग, जी.एस.सी. जामदे, क्षेत्र के गायता, पुजारी, लघु वनोपज सहकारी समिति के अध्यक्ष, वन सुरक्षा संयंत्र के सदस्य सहित अन्य सार्वभौम संगठन शामिल थे।राष्ट्रीय स्तर के संस्थान भारतीय प्राकृतिक राल एवं गोंद संस्थान नामुकम क्रोमा के सहयोग से तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है। वहाँ से ए.आर.सी. वैज्ञानिक प्रमुख तकनीकी अधिकारी ए.बी. आजाद और तकशियन शक्तिधर कोयरी के साथ ही ग्राम तिरकादंड विकासखंड चरमामा रेजिडेंट पुरषोत्तम मंडावी और कांकेर रेजिडेंट नेशनल को पटेल द्वारा लाख पालन करने वाले किसानों को प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें किसानों को लाख खर्च के लिए बीहन लाख कृषक वृक्ष प्रबंधन और कटाई-छंटाई की तकनीक की जानकारी दी गई, जिससे उत्पादन क्षमता में वृद्धि हो और किसानों को अधिक से अधिक लाभ हो। प्रशिक्षण के दौरान सभी 06 आतंकियों के लखपति स्व-सहायता समूह को लाख फॉलोअर किट भी प्रदान की गई।प्रशिक्षण कार्यक्रम को अंतिम रूप देते हुए अंतागढ़ के विद्वान श्री विक्रमामंडी ने कहा कि यहां के किसानों को वैज्ञानिक पद्धति से लाखों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि वे अधिक से अधिक अध्ययन प्राप्त कर सकें, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें। इस क्षेत्र में कुसुम के पेड़ की भरमार है, जमीन पथरीली और अपेक्षाकृत कम मसाले के कारण धान का निर्माण होता है, उनके संकेत और टिकरा जमीन में स्थिरता की मात्रा में कुसुम के पेड़ हैं, जिनमें लाख बनाकर बनाया जा सकता है। किसान अगर वैज्ञानिक तकनीक से लाख की खेती करें तो वे एक साल में लाखों तक कमा सकते हैं। हमने ऐसी व्यवस्था की है कि यहां किसानों को लाख पालन का प्रशिक्षण दिया जाए, इसके लिए खनिज न्यास निधि से व्यवस्था की जाती है। सभी किसान पूर्ण लग्न के साथ इस प्रशिक्षण में सिंखे और लाख अनुयायी को अपनाकर आत्मनिर्भरता। कुसुम स्टडीज के संरक्षण और समृद्धि के लिए उनके द्वारा कुसुम स्टडीज के प्रोजेक्ट का भी कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम की तैयारी कर रहे लच्छूराम गावड़े ने भी किसानों को लाख की खेती के लिए मंजूरी दे दी। पश्चिम वनमंडल भानुप्रतापपुर के वनमंडल अधिकारी हेमचंद पहारे ने बताया कि यहां के किसानों को प्रशिक्षण के लिए रांची भेजा जाएगा ताकि वे वैज्ञानिक तकनीक से लाखों का उत्पादन करना सीख सकें। 6 अरेस्ट और 10 एस एल एम्प्लॉयमेंट के माध्यम से क्षेत्र में 600 से अधिक किसान लाख उत्पाद जुड़े हुए हैं और हजारों कुसुम, बेर और पलाश के पेड़ों पर एक लाख से अधिक कार्य प्रगति पर हैं।
उल्लेखनीय है कि ओडिसा से महाराष्ट्र के मध्य में स्थित झील द्वीप के उत्तरी ढलान की उबड़-खाबड़ एवं पथरीली भूमि कृषि के लिए हल्की कम मोटाई की बनी हुई है। इनमें कुसुम के प्राकृतिक वृक्ष प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। यहां के नदी-नालों में भी कुसुम के पेड़ों की छाप है। किसानों को उनकी निजी भूमि पर उपलब्ध कुसुम वृक्षों के दृश्यों को ध्यान में रखते हुए 2000 के दशक में 2000 के दशक में 2000 के दशक में किसानों को उनकी निजी जमीन पर अधिकार दिया गया था। आदर्श लाख परियोजना में रेगिस्तान के किसानों के साथ-साथ युवा भी बढ़-चढ़कर भागीदारी निभा रहे हैं। क्षेत्र के जनजातीय एवं अन्य वन्य क्षेत्रों में इस योजना को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है। परियोजना के माध्यम से कुसुम एवं बियर के प्रतिष्ठित, संरक्षण और विशिष्टता को भी बढ़ावा दिया जाए, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी स्थान मिले। शासन का उद्देश्य वनांचलों के किसानों को आत्मनिर्भर बनाना और पारंपरिक फार्मेट पर आधारित उत्पाद उपलब्ध कराना है। इसी दिशा में लाखों उत्पादों का प्रशिक्षण, गोदाम एवं विपणन व्यवस्था शुरू की जा रही है। जो कभी किसी क्षेत्र के प्रभाव के कारण आंशिक रूप से माना जाता था, वहीं आज सरकारी मंजूरी, ग्राफिक्स प्रशिक्षण और किसानों की मेहनत से लाख उत्पादन के माध्यम से विकास और समृद्धि की नई राह पर उद्योग है।
लाख पालन से किसानों की आय में हुई वृद्धि
लाख से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, अंतागढ़ विकासखंड के ग्राम बिरकोंडल के किसान श्री विकास हुर्रा ने वर्ष 2025-26 में लगभग 3 लाख रुपये की आय से लाख रुपए का पालन क्षेत्र में सर्वाधिक लाभ प्राप्त किया है। कोयलीबेड़ा क्षेत्र के ग्राम चिलपारस निवासी श्री राकेश नेता के पास एक लाख रुपये प्रति वर्ष की आय है। इसी प्रकार भानुप्रतापपुर विकासखंड के ग्राम धनेली के श्री जयश्री सलाम ने लाख पालन से लगभग 93 हजार रुपये की आय अर्जित की। लाख पालन की खेती करने वाले इन सभी किसानों का कहना है कि लाख पालन की खेती से उन्हें साल में अतिरिक्त निवेश भी प्राप्त हो रहा है, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। साथ ही वनों के मूल सिद्धांतों के कारण वन संरक्षण और विशिष्टता को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
