*कमलनाथ के साथ मिलकर राज्य को लूट रहा था आईपीएस अफसर सुशोभन बनर्जी*
*विजया पाठक, एडिटर, जगत विजन*
किसी भी राज्य में विकास की इबारत तभी लिखी जा सकती है जब वहां की सरकार और प्रशासन के अफसर कंधे से कंधा मिलाकर नए विचारों के साथ काम करें। लेकिन यदि सरकार और प्रशासन के उच्च कोटि के अफसर ही भ्रष्टाचार कर काले धन का खेल खेलने लगे तो जरा सोचिए उस राज्य का भविष्य कैसा होगा। कुछ ऐसा ही खेल खेला है आईपीएस अफसर सुशोभन बनर्जी ने कमलनाथ सरकार के साथ मिलकर। एक बार फिर मध्य प्रदेश की अफरशाही की ईमानदारी पर प्रश्न चिन्ह लग गया है। कमलनाथ के करीबियों के यहां आयकर विभाग द्वारा लोकसभा चुनाव से पहले की गई छापेमार कार्यवाही से जुड़े कुछ प्रमुख दस्तावेजों में जिन बातों का खुलासा हुआ है उससे तो सिर्फ यही अंदाजा लगाया जा सकता है कि यदि प्रदेश में कुछ और वर्ष कमलनाथ की भ्रष्ट सरकार होती तो शायद प्रदेश की लुटिया डूबनी तो स्वभाविक थी। खास बात यह है कि इस पूरे कांड में न सिर्फ राजनेता कटघरे में खड़े हुए है बल्कि कमलनाथ सरकार के दौरान उनके सबसे चहेते आईपीएस अफसरों में शामिल एडीजी सुशोभन बनर्जी का नाम भी खुलकर आ गया है। कमलनाथ सरकार तो तबादला और अधिकारियों से व्यापार कराने के लिए प्रसिद्ध थी। लेकिन अधिकारियों की भी तो कोई नैतिकता होती है उन्हें लंबे समय तक काम करना है कुछ तो हदे होनी चाहिए थी। लेकिन
सुशोभन बनर्जी ने सारी हदों को पार करते हुए और अपने पद का दुरुपयोग करते हुए कमलनाथ के लिए जनता से लूट खसोट कर लाखों रुपए इधर से उधर किए है। यह मध्य प्रदेश की अफसरशाही के लिए सबसे शर्मनाक बात है कि जिन हाथों में प्रदेश के प्रशासन और कानून व्यवस्था की कमान है। वहीं लोग यदि राजनेताओं के इस षडयंत्र में हिस्सेदार हो तो भला क्या किया जा सकता है। सुशोभन बनर्जी और कमलनाथ सरकार का ताना बाना काफी पुराना है। अक्टूबर 2016 भोपाल जेल ब्रेक कांड की लापरवाही में कहीं न कहीं सुशोभन बनर्जी भी जिम्मेदार रहे है। क्योंकि वो उस समय वहां एडीजी जेल के पद पर पदस्थ थे। इतने बड़ी लापरवाही के बाद जहां शिवराज सरकार ने बनर्जी को एडीजी जेल के पद से हटाया था। वहीं कमलनाथ सरकार ने आते ही अक्टूबर 2019 में उन्हें डीजी ईओडब्ल्यू जैसे प्रभावशाली पद पर बैठाया। बनर्जी का इस पद पर बैठना साफ इस ओर इशारा करता है कि किस तरह से ईओडब्ल्यू के माध्यम से शहर के व्यापारियों पर दबाव बनाकर लाखों करोड़ों रुपए इकट्ठा करने का कारोबार यहां शुरु हुआ। लेकिन कारोबार कोई बड़ा रुप ले पाता इससे पहले ही आयकर विभाग की छापे मार कार्य़वाही ने इस पर ब्रेक लगा दिया। हलांकि बनर्जी इस खेल को दोबारा आगे बढाते उससे पहले ही मार्च 2020 में शिवराज सरकार ने आते ही सुशोभन बैनर्जी को डीजी ईओडब्ल्यू के पद से हटाकर पुलिस अकादमी सागर भेज दिया था। कुल मिलाकर बनर्जी जैसे लालची अफसरों को तत्काल प्रभाव से सेवा से मुक्त कर देना चाहिए। ताकि यह अन्य अफसरों के लिए एक सबक हो और वो इस तरह की कार्यशैली को अपनाने से खौफ खाए। क्रमश: …
