कुपोषण पर बड़ी जीतः मासूम रियांश की जिंदगी में लौटी मुस्कान।

पालनार स्कूलपारा आंगनबाड़ी केंद्र के समन्वित प्रयासों से मिला नया जीवन।

बीजापुर – कलेक्टर  संबित मिश्रा के निर्देशन में महिला एवं बाल विकास विभाग के द्वारा निरंतर कुपोषण उन्मूलन हेतु कार्य किया जा रहा है। कुपोषण से जूझ रहे बच्चों को समय पर पहचान और सही उपचार मिल जाए तो उन्हें स्वस्थ जीवन दिया जा सकता है। इस बात को सही साबित किया है बीजापुर परियोजना के रेड्डी सेक्टर अंतर्गत ग्राम पंचायत पलनार के आंगनबाड़ी केंद्र पलनार स्कूलपारा ने। यहाँ पंजीकृत बालक रियांश पिता बाबलू ताती, माता नमिला ताती गंभीर कुपोषण की स्थिति से बाहर आकर पूर्णतः स्वस्थ हुआ है।

गंभीर कुपोषण की स्थिति, परिवार था चिंतित– नियमित वजन एवं स्वास्थ्य निगरानी के दौरान बच्चे का वजन केवल 6 किलो 200 ग्राम और लंबाई 62.1 सेमी दर्ज की गई, जो आयु के अनुसार अत्यंत कम थी। स्थिति गंभीर होने पर बच्चे को विशेष निगरानी सूची में शामिल किया गया और तत्काल उपचार प्रक्रिया आरंभ की गई। इस प्रयास में परियोजना बीजापुर, पर्यवेक्षक शबती पोयाम, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता जगदेश्वरी ओडेयाज, सहायिका मोती नक्का, ग्राम पंचायत सचिव तिरुपति कुडियम तथा सरपंच मालती ताती का सराहनीय योगदान रहा।

एनआरसी में भर्ती शुरू हुआ सुधार का सफर– बेहतर उपचार और पोषण प्रबंधन के लिए रियांश को एनआरसी (Nutrition Rehabilitation Centre) में भर्ती कराया गया जहाँ उसे संतुलित भोजन, दवाइयों, नियमित स्वास्थ्य जांच और माता को पोषण परामर्श सहित सभी आवश्यक सेवाएं प्रदान की गईं। एनआरसी से वापसी के समय उसका वजन बढ़कर 7 किलो हो चुका था।

निरंतर देखभाल, नतीजा आया शानदार– एनआरसी के बाद भी आंगनबाड़ी केंद्र में लगातार वजन मॉनिटरिंग, गर्म पका भोजन, पोषण आहार, स्वास्थ्य परीक्षण एवं परिवार के साथ नियमित काउंसलिंग की प्रक्रिया जारी रही। परिवार ने भी सहयोग करते हुए समय पर आंगनबाड़ी सेवाओं का लाभ लिया।

आज स्वस्थ और ऊर्जावान है रियांश- निरंतर देखभाल और सामूहिक प्रयासों का परिणाम यह रहा कि आज रियांश पूरी तरह स्वस्थ है। वर्तमान वजन 10 किला, वर्तमान लंबाई 81.2 सेमी, सक्रियता खिलखिलाहट और स्वस्थ शारीरिक विकास रियांश अब सामान्य श्रेणी में आ चुका है और स्वस्थ भविष्य की ओर आगे बढ़ रहा है।

समुदाय के लिए प्रेरक उदाहरण- रियांश की यह सफलता कहानी साबित करती है कि समय पर पहचान गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ, मजबूत आंगनबाड़ी तंत्र, पंचायत एवं परिवार का सहयोग यदि एक साथ जुड़ जाएँ तो कुपोषण जैसी चुनौती पर आसानी से विजय प्राप्त की जा सकती है। बीजापुर परियोजना की यह उपलब्धि न केवल एक बच्चे की सफलता है बल्कि पूरे समुदाय के लिए आशा और प्रेरणा का उज्ज्वल संदेश है।