डांडेसरा में मखाना की खेती का उद्घाटन – ग्रामीण विपणन समिति बनाने की दिशा में बड़ा कदम।

धमतरी – जिले में ग्रामीण निर्माण और महिलाओं को आर्थिक रूप से बढ़ावा देने की दिशा में आज एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे स्थित ग्राम डांडेसरा के छोटे-छोटे डबरियों में मखाना बाजार की शुरुआत स्व-सहायता समूह शैलपुत्री एवं नई किरण की महिलाओं द्वारा की गई। नई फ़सल की शुरुआत से क्षेत्र में उत्साह एवं उत्सुकता का माहौल देखने को मिला है।
महिला लिसा को पूर्व में मखाना उत्पादन, प्रबंधन एवं फसल कटाई का तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान किया गया था। इसमें सबसे पहले ग्रामीण महिलाओं को नए आय-सृजन के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे और स्थानीय उद्योगों को जगह दी जाएगी।
डॉक्टर श्री अविनाश मिश्रा आज डांडेसरा क्षेत्र और महिला लिपस्टिक का हौसला बढ़ाया। उन्होंने नई खेती की शुरुआत पर बधाई देते हुए कहा कि मखाना इस क्षेत्र की जलवायु और जलवायु रसायन विज्ञान बेहद कम लागत वाला है।
कलेक्टर ने बताया कि दो से तीन फीट पानी की व्यवस्था है। फल छह माह में तैयार हो जाता है। यह धान की तुलना में अधिक है। मखाना में केवल आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी अत्यधिक पोषक तत्व होते हैं, जिनमें विटामिन, स्ट्राबेरी, कैल्शियम, मैग्नीशियम, आयरन और प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
कलेक्टर श्री मिश्रा ने कहा कि धमतरी में आधुनिक खेती करने वाले किसानों और महिला स्व-सहायता समूहों के लिए आय बढ़ाने का नया मार्ग प्रशस्त होगा। प्रशासन का लक्ष्य है कि धान के बेहतर विकल्प के रूप में बड़े पैमाने पर खाना बनाया जाए। तालाबों को बनाने के लिए उपयुक्त दिशा-निर्देश भी आवश्यक हैं।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि हाल ही में आयोजित धमतरी कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा छत्तीसगढ़ के मखाना बोर्ड में शामिल होने की घोषणा की गई थी, जिससे राज्य में मखाना उत्पादन को राष्ट्रीय स्तर का सहयोग प्राप्त होगा। इसके पूर्व जिले के कुरुद विकासखंड के ग्राम राखी, दुर्ग एवं सरसोंपुरी को खाना बनाने की खेती के लिए पायलट प्रोजेक्ट के रूप में अंकित किया गया है। इसमें कृषि उत्पादन की प्रगति और फसल की कटाई भी शुरू हो गई है।
कार्यक्रम में उप-अधिवक्ता उद्यानिकी श्रीमती पूजा कश्यप साहूकार, उप-अध्यक्ष कृषि श्री इशेष साहूकार एवं इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के प्रधान कृषि वैज्ञानिक डॉ. गजेंद्र चंद्राकर समेत अन्य अधिकारी उपस्थित रहे, यह सबसे पहले धमतरी जिले में खाना उत्पादन के उभरते केंद्र के रूप में स्थापित उद्योग और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा प्रदान करेगा।