प्रमिला की रोट आयरन कला को बिहान से मिली नई दिशा 05 लाख से अधिक की हो रही वस्तु।

कोंडागांव – राष्ट्रीय ग्रामीण ग्रामीण मिशन ‘बिहान’ के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में निवासरत महिलाओं एवं युवाओं को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्व-सहायता समूह का गठन किया गया है। इसके माध्यम से महिलाओं को वित्तीय समावेशन, कौशल ऑटोमोबाइल और अपनी मार्केटिंग को सलाह देने के अवसर प्रदान किए जाते हैं। इस जिले की कई महिलाएं आज सफलता की नई कहानी लिख रही हैं। ऐसी ही एक राज की कहानी है विकासखंड, छोटे ग्रामराजपुर की रहने वाली प्रमिला मरकाम की, उनके परिवार की पारंपरिक रोट आयरन कला को ‘बिहान’ के सहयोग से नई पहचान और आज की शुरुआत लगभग 5 लाख 40 हजार रुपये की आय कर रही हैं।कोंडागांव जिले के सुदूर विकासखंड बड़ेराजपुर मुख्यालय से 15 किमी की दूरी पर स्थित ग्राम पंचायत छोटेराजपुर के पवित्रा स्व-सहायता समूह से जुड़ी प्रमिला का परिवार पहले मुख्य रूप से मठ और कृषि आधारित उद्यम पर अनुमोदित था। ग्रुप से जुड़ने के बाद उन्होंने रोट आयरन से 80 प्रकार की विभिन्न विद्याएँ तैयार करना शुरू किया। अपनी कला को राज्य और देश के अन्य मानकों तक के लिए बिहान ने नया मंच दिया और उन्होंने गुजरात, गोवा, दिल्ली, असम समेत कई जगहों पर आयोजित सरस मेलों में हिस्सा लिया, जहां से अब तक वे लगभग 12 लाख रुपये की कमाई कर चुके हैं।स्ट्रॉबेरी की समृद्ध संस्कृति और वनस्पति को चित्रित करती हुई प्रमिला अब तक 1500 से अधिक विद्याएं बना चुकी हैं, जिनकी कुल लागत 30 लाख रुपये है। इनमें से 857 सार्च का सस्ते सरस मेला, सरस गैलरी और स्थानीय उद्यमों में भुगतान किया गया है, जिससे उन्हें 13 लाख रुपये की आय प्राप्त हुई है। हाल ही में 06 सितंबर 2025 को दिल्ली में आयोजित सरस मॉल में उन्होंने 496 उत्पाद बेचकर 3 लाख 87 हजार 500 रुपये की आय अर्जित की। प्रमिला न केवल रॉट आयरन कला से अपनी नीतियों को शस्त्रागार बना रही हैं, बल्कि न केवल वन्यजीवन की संस्कृति और परंपरा को अमूर्त में पहचानने का काम भी कर रही हैं। प्रमिला ने खुशी जताते हुए कहा कि बिहान के माध्यम से रोट आयरन कला के विस्तार में सहयोग मिला और नई दिशा मिली। उन्होंने बिहान से शासन-प्रशासन के प्रति सहयोग के लिए सहयोग प्राप्त किया।