यूपी बिहार संघ -लोक रंग – रंग, राग और संस्कृति का 8 नवम्बर को होगा संगम।

किरंदुल में छठ पर्व की रौनक के साथ लौट रहा है ‘लोक रंग’

किरंदुल — छठ महापर्व के पावन अवसर पर यूपी बिहार सामाजिक एवं सांस्कृतिक परिषद एक बार फिर लेकर आ रहा है अपने बहुचर्चित सांस्कृतिक उत्सव “लोक रंग 2025” का दूसरा संस्करण।यह रंगारंग आयोजन 8 नवम्बर 2025 को रिक्रिएशन क्लब, किरंदुल में आयोजित किया जाएगा, जिसकी शुरुआत शाम 7 बजे से होगी। पिछले वर्ष की अपार सफलता के बाद इस बार का “लोक रंग” और भी अधिक भव्य, जीवंत और सांस्कृतिक विविधता से भरपूर होने जा रहा हैं मंच पर दिखेगी नृत्य और नाट्य की झंकार ।कार्यक्रम में प्रतिभागी प्रस्तुत करेंगे दो प्रमुख विधाओं में अपनी प्रतिभा नृत्य नाटिका , एकल नृत्य कला

जहाँ नृत्य नाटिका में समूह एक साथ मंच पर किसी कथा, ऐतिहासिक प्रसंग या भावनात्मक विषय को नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत करेंगे, वहीं एकल नृत्य में कलाकार अपनी व्यक्तिगत लय, भाव और अभिव्यक्ति से दर्शकों का मन मोह लेंगे। विजेताओं को मिलेगा नकद सम्मान, तालियों की गूंज बनेगी पुरस्कार । प्रतियोगिता में चयनित विजेताओं को आकर्षक नकद पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। संगठन के अनुसार, इस बार प्रतिभागियों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिलेगी और निर्णायक मंडल पारंपरिकता, रचनात्मकता और अभिव्यक्ति के आधार पर कलाकारों का मूल्यांकन करेगा। इस वर्ष का थीम — भारत की आत्मा के रंगों में रचा-बसा ।लोक रंग 2025” का थीम इस बार भारत की सांस्कृतिक जड़ों से प्रेरित है।

इसमें भारतीय परंपरा की गहराई, भक्ति का भाव, लोक जीवन की लय और आधुनिकता का संगम देखने को मिलेगा।

हर प्रस्तुति में भारत की आत्मा का एक नया रंग झलकेगा ।

कार्यक्रम के संयोजक हैं 

धीरेज पांडेय एवं गौरी शंकर तिवारी,जो लगातार प्रतिभाओं को मंच देने और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण के लिए कार्यरत हैं।आयोजन समिति में शामिल हैं सौरव सोनी, सुनील गुप्ता, पूर्णिमा अवस्थी, और कंचन शर्मा,जिनके अथक प्रयासों से यह आयोजन न केवल एक कार्यक्रम, बल्कि एक संस्कृति का उत्सव बन गया है । लोक रंग – जहाँ मंच नहीं, एक उत्सव सजता है । लोक रंग 2025 का उद्देश्य सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि स्थानीय प्रतिभाओं को अवसर देना और भारतीय संस्कृति की विविधता को नए स्वरूप में प्रस्तुत करना है।