बीजापुर जिले में PMGSY की सड़कों में अब तक 1000₹ करोड़ से ज्यादा खर्च फिर भी गुणवत्ताहीन निर्माण , कुछ महीनों में ही टूटने लगे पुलिये , सड़को में हुए गड्ढे।

पीएमजीएसवाय विभाग फिर सुर्खियों में

2 करोड़ की लागत से बनी सड़क और पुलिया भ्रष्टाचार की भेंट

ईश्वर सोनी बीजापुर

जिले में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत निर्माण कार्य एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गया है। लगभग 02 करोड़ रुपये की लागत से बनी सड़क और पुलिया की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार LO61-LO52 (CG17132) से अम्बेली तक 04 किलोमीटर लंबी सड़क और 02 बड़े पुलिया का निर्माण कराया गया था। लेकिन निर्माण कार्य में मानकों की अनदेखी और लापरवाही साफ झलक रही है।

एक पुलिया बह गया, दूसरा भी टूटा

ग्रामीणों का कहना है कि बनी दो बड़ी पुलिया में से एक पानी में पूरी तरह बह गया, जबकि दूसरा पुलिया आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो चुका है। बीच से पुलिया बैठने के भी पूरे आसार हैं। यह स्थिति किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

ग्रामीणों ने जताया रोष

स्थानीय लोगों ने खुलकर नाराजगी जताते हुए कहा –
“विकास कार्य में अनियमितता बरतना अपराध है। योजनाओं को धरातल पर लाना बेहद मुश्किल होता है, लेकिन ठेकेदार और अधिकारियों की मिलीभगत से गुणवत्ताहीन निर्माण कराया गया। यह जनता के पैसों की बर्बादी है।”

ग्रामीणों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

ठेकेदार ने जिम्मेदारी टाली

इस संबंध में निर्माण कार्य करने वाले कुलकर्णी एंड साहू बिल्डकॉन से संपर्क करने पर ठेकेदार ने कहा –
“जैसा विभाग ने कहा वैसा ही काम किया गया है। सड़क और पुलिया के संबंध में विभाग के ईई और इंजीनियर से पूछिए।”

विभाग मौन ,क्योकि ऊपर तक जाता है कमीशन

गुणवत्ता पर उठ रहे सवालों और पुलिया बहने की घटना के बावजूद विभागीय अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से ही यह भ्रष्टाचार संभव हुआ है।

ज़िले की सड़कें बनी भरस्टाचार की राह

अब तक 1000 करोड़ से अधिक खर्च, लेकिन गुणवत्ताहीन निर्माण

ज़िले में अब तक 1000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सड़क निर्माण पर खर्च की जा चुकी है। लेकिन हकीकत यह है कि सड़कों की गुणवत्ता जनता के सामने सवालों के घेरे में है।

भारी अनियमितताओं का खुलासा

कई सड़कों और पुलियों का निर्माण कागजों पर दर्ज हुआ, पर जमीनी हकीकत में अधूरा काम।

ठेकेदारों और अधिकारियों की मिलीभगत से करोड़ों का बंदरबांट।

मेंटेनेंस के नाम पर हर साल करोड़ों की राशि पास, लेकिन मरम्मत के नाम पर कुछ नहीं।

दो साल का मेंटेनेंस भी डकारा गया

सूत्र बताते हैं कि निर्माण एजेंसियों को सड़कों और पुलिया के 5 साल तक मेंटेनेंस की राशि भी दी जाती है। लेकिन बिना मरम्मत किए, यह पैसा कमीशन में बांट लिया गया।

जनता की परेशानी

जगह-जगह गड्ढों में तब्दील सड़कें।