महासमुंद – छत्तीसगढ़ शासन के पूर्व संसदीय सचिव विनोद सेवनलाल चंद्राकर. ने आरोप लगाया है कि प्रदेश की साय सरकार किसानों को आवश्यक डीएपी खाद उपलब्ध कराने में पूरी तरह विफल रही है। उन्होंने कहा कि सहकारी समितियोंमें पर्याप्त खाद उपलब्ध होने के जो सरकारी आंकड़े प्रस्तुत किए जा रहे हैं, वे जमीनी सच्चाई से बिल्कुल अलग हैं। हकीकत यह है कि किसानों को डीएपी खाद प्राप्त नहीं हो रही है, और उन्हें ऊंची कीमतों पर खुले बाजार से ही खाद खरीदनी पड़ रही है।चंद्राकर ने जानकारी दी कि खरीफ सीजन के लिए जिले में कुल 22,200 मीट्रिक टन डीएपी खाद की मांग थी, परंतु अब तक केवल 7,470 मीट्रिक टन खाद ही जिले में आई है। इसमें पूर्व स्टॉक 3,280 और नवीन आपूर्ति 4,190 मीट्रिक टन शामिल हैं। यानी अभी भी लगभग 14,730 मीट्रिक टन खाद की कमी बनी हुई है। उन्होंने सवाल उठाया कि जो खाद प्राप्त हुई है, वह वास्तव में किसानों तक पहुँची भी है या नहीं, क्योंकि बाजार में आसानी से डीएपी की ऊँची कीमतों पर उपलब्धता कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।उन्होंने कहा कि भाजपा की डबल इंजन सरकार को छत्तीसगढ़ के किसानों की कोई चिंता नहीं है। वर्तमान में किसान रोपा लगा रहे हैं और इस समय डीएपी की सबसे अधिक जरूरत होती है, मगर सोसाइटियों में इसकी भारी कमी है। पहले सरकार ने एनपीके खाद देने की बात कही थी, लेकिन उसकी आपूर्ति भी नहीं होसकी है।पूर्व विधायक ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की मंशा ही नहीं है कि किसान अच्छी पैदावार ले सकें। बुवाई के समय खाद और बीज की सबसे अधिक आवश्यकता होती है, लेकिन सरकार का रवैया पूरी तरह से उदासीन है। खरीफ से पहले खाद की व्यवस्था सुनिश्चित करनी थी, लेकिन न तो खाद रेक की समुचित व्यवस्था हुई है और न ही भंडारण की पर्याप्त तैयारी।
