सिहावा में बोल उठे चित्र, साक्षात महादेव के निम्न दर्शन, श्रृंगीऋषि के साथ पौराणिक कथाओं का इतिहास।

माँ अभियान से संवरने लगी जीवनदायिनी महानदी।

धमतरी – छत्तीसगढ़ की जीवनदायिनी महानदी इन दिनों सजने संवरने लगी है। सिहावा जिले में छत्तीसगढ़ की जीवनदायिनी महानदी के तहत जिला प्रशासन संवरने द्वारा मातृ अभियान शुरू किया गया है। कलेक्टर श्री अविनाश मिश्रा के नेतृत्व में सिहावा में महानदी के उद्गम स्थानों पर जिला प्रशासन द्वारा कई काम कराए जा रहे हैं। लेकिन आजकल श्रृंगिऋषि पर्वत स्थित गणेश घाट पर बने सुंदर धार्मिक और प्राकृतिक चित्रमय भूदृश्यों को अपनी ओर खींचा जाता है, अब यह स्लीप पॉइंट बन गया है।छत्तीसगढ़ की जीवनदायिनी महानदी अब एक नए रूप में सजने-संवरने जा रही है। वनांचल सिहावा में स्थित महानदी के उद्गम स्थल श्री गणेश घाट में मां महानदी जागरूकता अभियान के तहत सौंदर्यीकरण एवं जीर्णोद्धार का काम शुरू हो गया है। सिहावा-नगरी महानदी के उद्गम स्थल को डेको-संवारने का कार्य जिला प्रशासन द्वारा किया जा रहा है। इसके तहत ग्राफिक्स पर आकर्षक चित्रकारी ढूंढी जा रही है। गणेश घाट स्थित मंदिरों के शिखरों के मंदिरों पर धार्मिक और प्राकृतिक जीवन का आनंद लेते हुए रंग-बिरंगे आकर्षक चित्र उकेरे जा रहे हैं। इनमें श्रृंगीऋषि और सप्त ऋषियों के चित्र, चित्र जैसे-भालू, बाघ, बाघ, हाथी, नीलगाय, बंदर और वन भैंसा, वृक्ष, फूल-पत्तन और विदेशी पक्षियों के चित्र, भगवान भोलेनाथ और नंदी के चित्र जा रहे हैं। यह पेंटिंग्स महानदी उद्गम स्थल सिहावा-नगरी के धार्मिक महत्व को दर्शाती है, इसके साथ ही यहां की स्थानीय विविधताएं भी छिपी हुई हैं। इन सुंदर साज-सज्जा की वजह से आज इस क्षेत्र के लिए एक नया आकर्षण केंद्र बन गया है। लोग यहां सेल्फी लेना, तस्वीरें खींचना और दर्शन करना बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। जिला प्रशासन ने बिलासपुर के प्रसिद्ध कलाकर श्री लक्ष्मण की दुकान के लिए इन आकर्षक पेंटिंग्स का निर्माण कराया है। फ्रेंडशिप आर्टिस्ट ने जगदलपुर रोड केशकाल घाटी में भी मनमोहक तस्वीरें बनाई हैं। यही कलाकार इस बार सिहावा के पहाड़ों-चट्टानों में करीब 20 हजार फीट पेंटिंग बनाकर उन्हें नया रूप दे रहे हैं।रजिस्ट्रार श्री अविनाश मिश्रा ने बताया कि जिला प्रशासन महानदी उद्गम स्थल के जीर्णोद्धार एवं सौंदर्यीकरण के लिए मां अभियान चला रहा है। महानदी के उद्गम स्थल नगरी-सिहावा और उसके बाद के लगभग 30 किमी क्षेत्र में नदी की स्वच्छता, नदी की स्वच्छता, विशिष्टता से लेकर सौंदर्यीकरण के कई काम कलाकार जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि यहां वृहद मास पर रिवर वॉटर कंजर्वेशन के काम भी चल रहे हैं। कलेक्टर ने कहा कि नदी और आसपास के चट्टानों और श्रृंगीऋषि पर्वत के चट्टानों पर पेंटिंग पेंटिंग का हिस्सा है, जिससे इस क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिल रहा है। रजिस्ट्रार ने यह भी बताया कि कर्णेश्वर धाम के अंतर्गत महानदी उद्गम स्थल कॉरिडोर में हजारों साल पुराने मंदिर, गणेश घाट भी हैं, जिनकी संरचना अलग-अलग धार्मिक है। जिला प्रशासन इसे मां नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक की धरती पर विकसित करने का प्रयास कर रहा है। श्री मिश्रा ने यह भी बताया कि सिहावा-नगरी से कई पौराणिक किवदंतियाँ-गाथाएँ भी जुड़ी हुई हैं। इन पेंटिंग्स के माध्यम से यहां आने वाले दृश्य को सभी किवंदितियों और महाकाव्यों की जानकारी देने का भी प्रयास किया जा रहा है। रजिस्ट्रार ने बताया कि अभी तक ग्रेटडी कंजर्वेशन को 30 किमी तक का काम हो गया है। जहां सकरी नदी थी, उसे ठीक कर दिया गया है। नगरी क्षेत्र में नारियल के पौधे लगाएं, क्योंकि यहां नारियल के पौधे काफी अच्छे होते हैं। कलेक्टर ने कहा कि शासन का प्रयास है कि महानदी उद्गम स्थल को सौंदर्यीकरण और जीर्णोद्धार से इसे आकर्षण पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित किया जाए, ताकि यहां अधिक से अधिक पर्यटन और स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिले।