खेती में नवाचार: धमतरी में 20 जनवरी से शुरू हुई मखाने की खेती।

आगामी नवंबर माह में 100 अगस्त रकबे में खेती की योजना।

कृषि विज्ञान केंद्र से खेती के उपाय, किसानों को प्रशिक्षण भी दें।

मखाना उत्पाद से धमतरी को मिलेगी नई पहचान।

धमतरी – धमतरी जिले में कलेक्टर श्री अविनाश मिश्रा की पहल पर किसानों ने मखाने की खेती शुरू कर दी है। जिले के कुरूद विकासखंड के राखी और धमतरी विकासखंड के सरसोंपुरी और दरगाहन क्षेत्र में लगभग 20 रकबे में तालाबों में मखाने की फसल लगी है। जिसके लिए रजिस्ट्रार श्री मिश्रा ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के धमतरी किसानों को मखाने की खेती के बारे में जानकारी दी थी। कृषि विभाग के अधिकारियों ने भी किसानों को मखाने की खेती करने वाले से अलग करने के लिए प्रेरित किया था। किसानों को निःशुल्क प्रशिक्षण एवं तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया गया। जिला प्रशासन ने आगामी 100 नवंबर रकबे में मखाने की खेती की योजना बनाई है। किसानों को मखाने के वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केन्द्र में उपकरण तैयार कर उपलब्ध कराये जायेंगे। रजिस्ट्रार श्री अविनाश मिश्रा ने बताया कि अभी भी देश में मखाने की सबसे ज्यादा खेती बिहार में होती है। अब धमतरी से इसकी खेती से किसानों को फायदा तो होगा ही साथ ही धमतरी को एक नई पहचान भी मिलेगी।एग्रीकल्चर ने धमतरी जिले के मौसम और लो-लैंड सब्जी मंडी में मखाने की खेती के लिए उपयुक्त सलाह दी है। जिले में बड़े पैमाने पर मखाने की खेती करने वाले किसानों को देखते हुए बड़े पैमाने पर मखाने की खेती तैयार की जा रही है। कृषक श्री मिश्रा ने बताया कि किसानों को मखाने की खेती का निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जायेगा। मखाने के बीज से लेकर फल की झलक और अच्छे उत्पादन के लिए तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया जाएगा। किसानों को इस बारे में पूरी जानकारी के लिए मखाने के बारे में भी जानकारी दी जाएगी। कलेक्टर ने मखाने की खेती के लिए किसानों को कृषि एवं उद्यानिकी विभाग से मखाना अनुदान एवं सहायता भी उपलब्ध कराने की बात कही है। कलेक्टर ने मखाने के लिए स्थानीय स्तर पर इकाई के उपयोग के लिए उद्योग विभाग और नाबार्ड के अधिकारियों से भी बात की है।

धान के बदले मखाना से मिल सकता है दुगुना फ़ायदा-

कृषि विशेषज्ञ-वैज्ञानिकों का कहना है कि धान के बदले मखाना की खेती से किसान दो गुना मुनाफा ले सकता है। एक अखरोट की खेती से किसानों को जहां औसत 75 हजार रुपये का फायदा मिलता है, वहीं एक अनाज में किसान को औसत 75 हजार रुपये का फायदा मिल सकता है। कृषि ने बताया कि मखाने की फसल छह महीने की होती है। यह फल एक फुट से लेकर एक फुट तक के पानी से भरे खेत में ले जाता है। एक ओकराबे में लगभग चार हज़ार रजिस्ट्री का उत्पाद शामिल है, जबकि अन्य में लगभग दस प्रतिशत उत्पाद शामिल हैं। कृषि का मत यह है कि छत्तीसगढ़ में उगने वाला मखाना आकार में बड़ा और स्वाद अन्य राज्यों के मखाने से बेहतर है। इसके बीज के रूप में प्लाॅम पर प्रति शेयर दो लाख रुपए तक का मुनाफा हो सकता है।