नवापारा राजिम :–समीपस्थ ग्राम परसदा में मातृदिवस के अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए पूरन लाल साहू (व्याख्याता) ने कहा कि मातृ दिवस पूरे दुनिया में मई माँ के दूसरे रविवार को मनाया जाता है. मातृ दिवस मनाने का उद्देश्य माँ के प्रति सम्मान और प्रेम को प्रदर्शित करता है. माँ प्यार, दुलार और त्याग की प्रतिमूर्ति होती है.ज्योति साहू ने कहा कि भारतीय संस्कृति में माँ के प्रति लोगों में अगाध श्रद्धा रही है. क्यूंकि माँ शब्द में सम्पूर्ण सृष्टि का बोध होता है. मातृत्व की छाया में माँ न केवल अपने बच्चों को सहेजती है बल्कि आवश्यकता पड़ने पर उसका सहारा बन जाती है.मुस्कान साहू ने कहा कि माँ अपने आप में पूर्ण संस्कार, मनुष्यत्व व सरलता के गुणों का सागर है. माँ बच्चों की प्रथम गुरु होती है. माँ जन्मदात्री ही नहीं, बल्कि पालन पोषण करने वाली संस्कार निर्मात्री भी है. खुशबू साहू ने कहा कि माँ ममता की सागर होती है.माँ एक ऐसा शब्द है जिसमें पूरी दुनिया समा जाती है. माँ की ममता और उनके त्याग की व्याख्या करना किसी के लिए आसान नहीं है.
