सियासी नजर — रेलवे नोटिस – नोटिस के खिलाफ नेतृत्व राजनेतिक पार्टियों के लिए गले की फांस ।

( कौन कर रहा नेतृत्व – कांग्रेस ,भाजपा ,व्यापारी संघ या प्रभावित परिवार )

( दैनिक अजय उजाला में समाचार प्रकाशित होने के बाद नेतृत्वकर्ता का श्रेय लेने मची होड़ )

किरंदुल –  बुधवार को ईस्ट कोस्ट रेलवे के डी आर एम ललित बोहरा अपने एक दिवसीय प्रवास पर बचेली पहुंचे ।इस दौरान किरंदुल नगर पालिका परिषद के उपाध्यक्ष बबलू सिद्दीकी के नेतृत्व में भाजपा और कांग्रेस के साथ साथ व्यापारी संघ के सैकड़ों जनप्रतिनिधियों ने डिविजनल रेलवे मैनेजर डी आर एम ईस्ट कोस्ट रेलवे विशाखपट्नम से विभिन्न मुद्दों पर सार्थक चर्चा की थी । यह चर्चा विशाखपट्नम से दंतेवाड़ा तक संचालित होनी वाली एक्सप्रेस ट्रेन और पैसेंजर ट्रेन तो किरंदुल स्टेशन तक पुनः संचालित करने के साथ साथ रेलवे की जमीन पर वर्षों से काबिज निवासियों को रेलवे प्रबंधन द्वारा रिक्त करने के लिए दिये गए नोटिस पर भी डी आर एम से चर्चा की गई थी ।किरंदुल के सियासी नजरिए से राजनेतिक गलियारों में किरंदुल नगर पालिका के उपाध्यक्ष बबलू सिद्दीकी की इस पहल और ईस्ट कोस्ट रेलवे विशाखपट्नम के डी आर एम ललित बोहरा से जनप्रतिनिधियों के एक प्रतिनिधि मंडल के साथ मुलाकात ने अपने पीछे कई राजनेतिक सवाल छोड़ दिये हैं जिसमे अगर सियासी नज़र डाली जाए तो पहला सवाल तो यह है किरंदुल पालिका में फिलहाल अध्यक्ष पद पर भाजपा की रूबी सिंह काबिज है तो उपाध्यक्ष के नेतृत्व में डी आर एम से मिलने वाले प्रतिनिधि मंडल में पालिकाध्यक्ष की अनुपस्थिति कई सवालों को खड़े करती नज़र आती हैं ।साथ ही यह सवाल भी राजनैतिक फिजा में गूंज रहा है कि पालिका के कांग्रेसी उपाध्यक्ष के प्रतिनिधि मंडल में किरंदुल पालिका के कई भाजपा के वर्तमान और पूर्व पार्षद,और पूर्व में भाजपा के कई पदों को सुशोभित कर जनप्रतिनिधियों के साथ बचेली पालिका के भाजपाई उपाध्यक्ष सतीश प्रेमचंदरानी जैसे भाजपा के मुख्य प्रतिनिधि किरंदुल पालिका के कांग्रेसी उपाध्यक्ष बबलू सिद्दीकी के नेतृत्व वाले प्रतिनिधि मंडल में शामिल हो कर रेलवे के डी आर एम से कांग्रेस के पालिका उपाध्यक्ष के नेतृत्व में मिल कर किरंदुल की जनता की समस्या के निराकरण की बात करेंगे तो नगर में तो इस बात की चर्चा होना लाजिमी है कि जिन भाजपा के नेताओं की सरकार केंद्र और छत्तीसगढ़ राज्य में है । वो स्थानीय भाजपा के नेता अगर खुद आगे ना बढ़ कर विपक्ष के कांग्रेस के नेताओं से अपनी ही सरकार के जिम्मेदार मंत्रियों से नगर की जनता की समस्या का निराकरण करने की कोशिश करते हुए नज़र आते हैं । तो उन जिम्मेदार स्थानीय भाजपाई नेताओं पर जनता की उंगली उठना तो लाजिमी सी बात है । कल इस नेतृत्व को लेकर समाचार पत्र अजय उजाला में प्रकाशित हुई खबर के बाद बैलाडीला व्यापारी संघ ने भी व्हाट्सएप के जरिए जानकारी दी कि बैलाडीला व्यापारी संघ ने भी अपने लेटर हेड पर डी आर एम को ज्ञापन सौप कर वर्षों से निवासरत परिवारों को बेदखल करने के नोटिस का विरोध किया है ।तो वहीं दूसरी तरफ किरंदुल के स्थानीय भाजपा नेताओं ने भी मौन धारण कर कहा हैं कि डी आर एम से मिलने भाजपा का कोई प्रतिनिधि मंडल कांग्रेस के पालिका उपाध्यक्ष के नेतृत्व में नहीं गया था ।स्थानीय भाजपा के नेताओं का कहना है कि हम पार्टी की ओर से ना जा कर प्रभावित परिवारों की ओर से उनकी बातों को रखने रेलवे डी आर एम के पास गए थे । किरंदुल के सियासी घटनाक्रम में अब चर्चा यह है कि रेलवे के द्वारा प्रभावित परिवारों को थमाए गए नोटिस के खिलाफ रेलवे प्रबंधन से कौन लड़ेगा और कौन प्रभावित परिवारों का नेतृत्व करेगा ।क्या राजनेतिक पार्टी कांग्रेस या भाजपा के जनप्रतिनिधियों की टीम या बैलाडीला व्यापारी संघ के पदाधिकारियों का प्रतिनिधि मंडल या रेलवे की नोटिस पाने वाले खुद प्रभावित परिवार ।