नगरी /राजशेखर नायर – शासकीय स्कूल के पालकों के बारे में यही सोच ज्यादातर रहती है कि वे विद्यालय को सहयोग नहीं करते या विद्यालय में उपस्थित नहीं होते। इसके ठीक उल्टा सिंगपुर के पालक हैं। जैसे ही पालकों को पता चला कि सेजेस सिंगपुर का परीक्षा परिणाम शत प्रतिशत आया है वैसे ही पालक मिठाई एवम फटाकों के साथ स्कूल पहुंचे। एक दूसरे को बधाई देकर मिठाई खिलाये,बधाई दी एवम खूब नाचे गाये भी। दृश्य बड़ा भावुक था। ब्लॉक मुख्यालय मगरलोड से 25 किलोमीटर दूर वनांचल क्षेत्र में स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय सिंगपुर में कक्षा दसवीं में जहां 46 विद्यार्थियों में से 37 विद्यार्थी प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए और शेष 9 विद्यार्थी द्वितीय श्रेणी में उत्तीर्ण हुए ।इसी तरह से हायर सेकंडरी परीक्षा में कला, वाणिज्य, विज्ञान संकायों के कुल 27 विद्यार्थी शामिल हुए जिसमे 21 विद्यार्थी प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए और शेष 6 द्वितीय श्रेणी में उत्तीर्ण हुए इस तरह स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय सिंगपुर के बोर्ड परीक्षा का परिणाम शत प्रतिशत रहा l वनांचल, दूरांचल और कमार जैसे विशेष पिछड़ी जनजाति बहुल क्षेत्र के स्कूल में इस तरह का शत प्रतिशत परीक्षा परिणाम लाना आसान काम नहीं था इस सफलता के पीछे छुपा है स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय सिंगपुर के प्राचार्य डॉ व्ही पी चंद्रा का नेतृत्व,एस एम डी सी एवम शिक्षकों का संकल्प और पालकों का जुनून। पूरे शाला परिवार की अटूट मेहनत और लगन ने दिखा दिया कि असम्भव कुछ भी नहीं है।सत्र प्रारंभ से पूर्व एस एम डी सी की उपस्थिति में कार्य योजना एवम रणनीति बनाई गई। एस एम डी सी एवम हर पालकों को इसकी जानकारी दी गई तथा शिक्षक,पालक,एवम एस एम डी सी के बीच दायित्वों का बंटवारा हुआ।लक्ष्य प्राप्ति के लिए कई कड़े निर्णय लिए गए। समय पर उपस्थिति, पूरे कॉपी किताब,ड्रेस कोड के साथ गृह कार्य की अनिवार्यता पर ज्यादा जोर दिया गया। इधर स्कूल में सत्रह प्रकार की समिति बनी। हर समिति के लिए जिम्मेदारी तय की गई। प्रार्थना एवम लंच को भी एक कालखंड बनाया गया। हर पालकों ने बच्चों के लिए टिफिन की व्यवस्था की। बच्चों के साथ शिक्षकों को लंच करना अनिवार्य किया गया। हर दिन कक्षा में अभ्यास कार्य, गृह कार्य तय किया गया। पालकों को जिम्मेदारी दी गई कि गृह कार्य कराकर ही बच्चों को स्कूल भेजें। पालकों ने इसे बखूबी निभाया। इधर शिक्षकों ने भी अपने लिए ड्रेस कोड तय किया। हर दी के कार्य की समीक्षा के लिए मास्टर आन ड्यूटी लागू की गई। बच्चों की छुट्टी के बाद प्रतिदिन के कार्यों की समीक्षा हुई और आगामी दिन के कार्यों का निर्धारण किया गया। शिक्षकों को समझ आधारित कक्षा शिक्षण का प्रशिक्षण दिया गया। शिक्षकों के लिए कक्षा में टी एल एम एवम गतिविधि को अनिवार्य किया गया। साप्ताहिक एवम्मासिक टेस्ट और टेस्ट के बाद डेटा एनालिसिस किया गया। बच्चों के अधिगम की ग्रेडिंग की गई। हर बच्चों पर नजर रखने के लिए ग्रेड वार,विषय वार ग्रुप विभाजन किया गया। अध्ययन हेतु बच्चों को सुबह फोन कर उठाया गया। हर पालकों को मासिक मीटिंग में आना अनिवार्य किया गया। मासिक मीटिंग में ही बच्चों के स्तर के बारे में जानकारी पालकों को दी गई। शाला की शुरुआत संगीतमय प्रार्थना से की गई। प्रार्थना सम्पन्न कराने के लिए प्रतिदिन शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई। प्रेरक प्रसंग,महापुरुषों की जीवनी के साथ प्रतिदिन बच्चों को मोटिवेशनल स्पीच दी गई। इधर शत प्रतिशत पालकों को विद्यालय से जोड़ने हेतु जातिवार पालकों की सूची बनाई,उनसे बात की गई। दिन में पालकों से मुलाकात नहीं होने की स्थिति में पालकों से रात में बातचीत की गई। जातिवार संकल्प लेकर जिम्मेदारियाँ दी गई। महिलाओं की शत प्रतिशत भागीदारी हेतु ” माँ भी स्कूल आएगी ” कार्यक्रम चलाया गया। किस माता को कैसे विद्यालय तक लाना है इसके लिये माइक्रोप्लान तैयार किया गया। हर दिन हर बच्चा स्कूल आये इस हेतु शिक्षक एवम पालकों की निगरानी समिति बनाई गई। बच्चे की एक दिन की अनुपस्थिति होने की दशा में उनके पालकों को फोन से बात कर स्कूल बुलाया गया तथा एस एम डी सी के सदस्यों के द्वारा सवाल जवाब किया गया। बच्चों के रिजल्ट को लेखन भी प्रभावित करता है। अतः हिंदी,अंग्रेजी एवम एक अन्य मनपसंद के विषय का दो दो पेज अनुलेख कराया गया ताकि लिखावट सुधरे। बच्चों के परफॉर्मेंस के आधार पर पोर्टफोलियो तैयार किया गया। हर बच्चे के कमजोरियों का चिह्नांकन कर उसे दूर किया गया। शिक्षक तथा बच्चों के बीच मेंटर तथा मेंटरी के कांसेप्ट को लागू किया गया। शिक्षकों के व्यावसायिक दक्षता के विकास हेतु एन ई पी 2020 के अनुरूप स्वाट एनालिसिस कर उन्हें एकेडमिक सपोर्ट दिया गया। सामूहिक लक्ष्य निर्धारित कर शिक्षकों में टीम भावना विकसित की गई। एस एम डी सी को सक्रिय एवम जागरूक बनाने हेतु उनका उन्मुखीकरण कर उन्हें दायित्व सौंपा गया। इस तरह से परस्पर सहयोग,टीम भावना और सामूहिक लक्ष्य से शत प्रतिशत लक्ष्य को प्राप्त किया गया। ज्ञात हो कि विगत वर्ष 10 वीं का परिणाम 72 प्रतिशत तथा 12 वीं का परिणाम 54 प्रतिशत था जिसे जोश जुनून के साथ शत प्रतिशत तक पहुंचा दिया । विद्यालय में खुशियां मनाने के लिए पहुंचने वाले पालकों में मुख्यतः एस एम डी सी के अध्यक्ष धनन्जय साहू,उपाध्यक्ष राधेलाल सिन्हा, सदस्यों में अयूब खान रिजवी,विष्णु निर्मलकर,सुनीता ध्रुव,सफीना बानो,विधायक प्रतिनिधि इशहाक खान,केशव साहू, हरि मरकाम,उप सरपंच ज्योति तिवारी, डी पी बागड़े,सरपंच लोमेश्वर साहू, डॉ हेमंत साहू,तोरण कंवर, हेमंत मरकाम, टिकेश्वर ध्रुव ,गोकुल ध्रुव,चंपा साहू,भूषण लाल,आदि के नाम शामिल हैं। कार्यक्रम समापन के अवसर पर पूरे परिसर को सी सी टी वी कैमरे से लैस करने हेतु पालकों ने एक लाख रुपये सहयोग का संकल्प लिया। सेजेस के प्राचार्य डॉ व्ही. पी.चन्द्रा ने एस एम डी सी के सदस्य तथा शिक्षकों के प्रति आभार प्रकट किया।
