आम जनता के हिस्से की बिजली उद्योगों को बेच रही सरकार : विनोद चंद्राकर।

 लगातार बिजली कटाैती किसान परेशान, सूखने लगे हैं खेत।

नि:शुल्क बताकर स्मार्ट मीटर लगाया, अब उपभोक्ताओं से वसूली की तैयारी।

महासमुंद – पूर्व संसदीय सचिव व महासमुंद के पूर्व विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने कहा कि भाजपा से न तो सरकार संभल पा रही है और न ही प्रदेश की व्यवस्थाएं। भाजपा सरकार प्रदेश में बिजली पूर्ति नहीं कर पा रही है। यह सरकार आम जनता के हिस्से की बिजली काटकर बड़े उद्योगपतियों को बेच रही है। इसके लिए ग्रामीण अंचल के साथ – साथ शहरी इलाकों में लगातार विद्युत कटाैती की जा रही है। ग्रामीण क्षेत्र में रबी धान फसल लेने वाले किसानों की चिंता बिजली कटाैती ने बढ़ा दी है। अनेक ऐसे किसान हैं जो कर्ज लेकर रबी धान फसल लगाए हैं, वर्तमान में धान में बाली आना शुरू हो गया है, कहीं-कहीं गभाैत स्थिति में है। ऐसे में धान को पानी की सख्त आवश्यकता है। लेकिन, लगातार बिजली कटाैती के चलते फसल बर्बाद होने की स्थिति में पहुंच गई है।श्री चंद्राकर ने कहा कि सुशासन की ढोल पीटने वाली भाजपा की सरकार लगातार जनता को छलने का काम कर रही है। प्रदेश के किसानों सहित आम उपभोक्ताओं को भी अब बिजली विभाग द्वारा बड़ा झटका देने की तैयारी की जा रही है। स्मार्ट मीटर को नि:शुल्क बताकर इसे अनिवार्य रूप से लगाने की बात कही गई। लेकिन, अब स्मार्ट मीटर की वसूली जनता से करने की तैयारी हो रही है। इसके लिए वितरण कंपनी प्रबंधन की ओर से विद्युत नियामक आयोग में रिवाइज पिटिशन दाखिल किया गया है। इसमें स्मार्ट मीटर सरचार्ज के नाम पर 367 करोड़ रूपए की मांग करते हुए नए टैरिफ में जोड़ने की बात कही गई है। जिसकी वसूली आम उपभोक्ताओं से करने की तैयारी सरकार कर रही है। श्री चंद्राकर ने कहा कि पूर्ववर्ती भूपेश सरकार के 5 साल के कार्यकाल में कभी आम उपभोक्ताओं व किसानों पर अतिरिक्त बोझ नहीं डाला गया। वहीं, हाफ बिजली बिल योजना का लाभ देकर आम जनता को राहत प्रदान की गई। वर्तमान में भारी भरकम बिजली बिल भेजा जा रहा है। गरीब तबके के लोग बिल देखकर चिंता में पड़ गए हैं। अनेक उपभोक्ता ऐसे हैं जिनका प्रतिमाह बिजली बिल 200 से 250 रुपए आता था। लेकिन, पिछले माह मार्च में ही इन उपभोक्ताओं को 1500 से 1700 रुपए का बिजली बिल थमा दिया गया है। रोजी-मजदूरी कर जीवन यापन करने वाले गरीब तबके के लोग भारी भरकम बिल देखकर चिंता में पड़ गए हैं।