जल जीवन मिशन से हर घर तक पहुंचाएं शुद्ध संदेश।
कोंडागांव – जिला मुख्यालय से लगभग 33 किमी दूर स्थित छोटा-सा ग्राम दांडवन आज जल प्रबंधन के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गया है। कभी-कभी जहां गांव की महिलाएं सुबह 4 बजे पानी के लिए तालाब और तालाबों तक जाती हैं, वहीं आज हर घर में नल से साफ सुथरा पानी मिलता है।जल जीवन मिशन के तहत संचालित कार्यकर्ताओं ने इस गांव की तस्वीर बदल दी है। ग्राम दण्डवन में अब पूरी तरह से जल आपूर्ति व्यवस्था क्रियान्वित है और इसके संचालन एवं निगरानी की जिम्मेदारियां स्वयं ने अपने हाथों में ले ली हैं। यह एशेलियल ग्राम विकास की एक मिसाल पेश कर रही है।
ग्राम दण्डवन की महिलाएँ कहती हैं, “पहले हम सुबह अँधेरे में अँधेरे मिलों में पानी लेकर जाते थे। छोटे-छोटे बच्चे भी साथ जाते थे। गर्मी में आलू और पटाखे सुखाते थे। तब पानी की एक-एक बूँद के लिए संघर्ष करना होता था।” उन दिनों अधिकतर जलस्रोत या तो गाँव से दूर थे या गर्मी में सुखजाते थे। महिलाओं के लिए घरेलू उपकरणों के साथ-साथ पानी की व्यवस्था करना एक चुनौती थी। इससे बच्चों की पढ़ाई, महिलाओं की उपस्थिति और बुजुर्गों का स्वास्थ्य प्रभावित हुआ।वर्ष 2019 में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने ग्राम दंडवन के अंतर्गत जल जीवन मिशन की शुरुआत की, इस योजना से भी जोड़ा गया। योजना के तहत गांव के प्रत्येक घर को पाइपलाइन से 132 घरेलू नल कनेक्शन (एफएचटीसी) प्रदान किए गए। अब हर घर में नल के माध्यम से शुद्ध जल की आपूर्ति हो रही है।इस योजना से केवल महिलाओं को राहत नहीं मिली है, बल्कि बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के जीवन में भी सकारात्मक बदलाव आया है। गर्भवती महिलाएं जो पहले पानी के दावे के लिए संघर्ष करती थीं, अब घर में ही प्रिया की सुविधा का लाभ उठा रही हैं। बच्चे को समय पर स्कूल जाना पड़ रहा है और बुजुर्गों को लंबी दूरी तय करने की आवश्यकता नहीं है।ग्राम दंडवन में कसाबती, नीलाबती, रामबती, भगवती और घसनी जैसी महिलाएं अब ‘जल घोड़े’ के रूप में काम कर रही हैं। ये महिलाएं पानी की गुणवत्ता की जांच करती हैं और गांव के अन्य लोगों को जल को स्वच्छ, जल संरक्षण और स्वास्थ्य के प्रति विशेषज्ञ बनाती हैं। इस योजना में महिलाओं को आत्मनिर्भर और आत्मनिर्भर बनाया गया है। वे अब केवल घर तक सीमित नहीं हैं। बल्कि समाज के कल्याण में भी सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं।दण्डवन की एक और खास बात यह है कि जल जीवन मिशन के तहत वास्तुशिल्प जला सिस्टम का संचालन और अध्ययन स्वयं द्वारा किया जा रहा है। इससे न केवल सिस्टम की स्थापना सुनिश्चित हुई है, बल्कि साझेदारी की भागीदारी और जिम्मेदारी की भावना भी प्रबल हुई है।ग्राम के सरपंच श्री कृष्ण आधार नाग के प्रतिनिधि हैं, “पहले पानी के लिए यात्राओं पर लंबे समय तक ऑर्डर दिए जाते थे। सुबह से ही पानी की सिफारिश की जाती थी, जिससे उन्हें घर का आराम करने और बच्चों को स्कूल में छूट देने की समस्या होती थी। गर्मी में बच्चे पैदा होते थे और पानी की भारी मात्रा हो जाती थी। लेकिन अब हर घर में नल से जल मिलता है गांव की महिलाएं, काम बुजुर्ग और सभी बच्चे खुश और बच्चे हैं। क्षमता का भी प्रतीक है। इस परिवर्तन से यह साबित होता है कि जब सरकार स्तर स्तर पर जागरूकता बढ़ाती है और समुदाय में सक्रियता से भाग लेती है तभी विकास साकार हो सकता है।
