
केन्द्र सरकार द्वारा कथित कृषि सुधार के नाम पर पारित कॉरपोरेट परस्त व किसान, कृषि और आम उपभोक्ता विरोधी कानून को वापस लेने, न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी कानून लागू करने, बिजली संशोधन बिल 2020 रद्द करने, प्रदूषण नियंत्रण कानून 2020 में किसान विरोधी कॉलम को निरस्त करने की मांग को लेकर दिल्ली सीमाओं सिंघु, टीकरी, शाहजहांपुर, गाजीपुर और पलवल में किसान आंदोलन जारी है। सीमाओं पर जारी आंदोलन को पांच महीना बीत चुका है और चार सौ के करीब किसानों ने अब तक अपनी कुर्बानी दी चुके हैं।
जिस तरह से खेत और किसानों को नष्ट करने का कानून केन्द्र सरकार ने लाया है ठीक उसी तरह से श्रम कानूनों को संशोधित कर चार श्रम कोड बिल बनाकर मोदी सरकार ने अपने कॉरपोरेट आकाओं की सेवा की है। मोदी सरकार ने करोना जैसे वैश्विक महामारीकी आपदा को अपने कॉरपोरेट मित्रों के लिए लूट के अवसर में तब्दील किया है। आंदोलन के मोर्चों पर संयुक्त किसान मोर्चा ने एक मई अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर मजदूर किसान पंचायत दिवस के रूप मे मनाने का निर्णय लिया है जिसे सफल करने अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा के सचिव तेजराम विद्रोही, झारखण्ड राज्य संयोजक कॉमरेड वशिष्ठ, अखिल भारतीय क्रांतिकारी महिला संगठन के उपाध्यक्ष उर्मिला, ट्रेड यूनियन सेंटर ऑफ इंडिया राजस्थान के संयोजक रितांश, अखिल भारतीय क्रांतिकारी विद्यार्थी संगठन के सचिव अक्षय ने संयुक्त आहवान किया है।
जारीकर्ता
तेजराम विद्रोही
सचिव
अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा
