प्रमोद दुबे
महासमुंद – नवरात्रि में जगदंबा की आराधना करने से सभी संकटों का निवारण होता है। एक वर्ष में चार नवरात्रि का पर्व आता है, जिसमें क्वांर और चैत्र नवरात्रि का पर्व आराधना और उपासना के लिए श्रेष्ठ है।क्वांर नवरात्रि में जगदंबा की प्रतिमा विराजित कर विधि विधान से पूजन करने से सभी कष्टों का निवारण होता है। स्थानीय लालवानी गली में दुर्गा मंदिर के सामने चल रहे देवी भागवत महापुराण कथा में चक्रवर्ती सम्राट सूरत और वैश्य व्यापारी समाधि की कथा का रसपान कराते हुए न व्यास पीठ से पं. पंकज तिवारी ने कहा कि न चक्र वर्ती राजा सूरत अपने प्रजा का पालन पुत्र के समान करते थे। एक समय शत्रुओं ने उनके राज्य पर चढ़ाई कर दी, इस विषम परिस्थिति में किसी ने भी राजा का साथ नहीं दिया और तो और मंत्रियों ने भी उनके 1 साथ छोड़ शत्रुओं से मिल गए।पराजित राजा भागते हुए जंगल की ने ओर चले गए। जहां उसे एक ऋषि सुनिधा ने का आश्रम दिखाई दिया। वहां पहुंचकर ऋषि द्वारा पूछने पर अपनी आपबीती बताई।इस पर ऋषि ने उन्हें सांत्वना प्रदान करते हुए कहा कि तपोबल के प्रभाव से यहां तुम सुरक्षित हो। यहां कोई नहीं आएगा। पराजित राजा वही समय व्यतीत करने लगे लेकिन कभी. कभी उसे पुराने दिनों की याद आ जाती थी और बहुत दुखी हुआ करते थे। एक दिन संध्या बेला में वृक्ष के नीचे राजा सूरत बैठे हुए थे उसी समय हताश निराश एक व्यक्ति आया उसे देखते ही राजा समझ गए यह कोई दुखी व्यक्ति है क्योंकि दूसरों का दुख वही समझ सकता है जिसने स्वयं दुख देखा हो। उस निराश व्यक्ति ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि वह वैश्य जाति का है और समाधि नाम से उसकी प्रसिद्ध है। उन्होंने अपने व्यापार में काफी धन कमाया। लेकिन जैसे ही उनके पुत्र बड़े हुए पुत्रों ने धन अपने पास रख लियाए उसकी पत्नी भी धन के लोभ में उसे छोड़ पुत्रों के पास चली गई। अब वह भटक रहा है। कहते हैं जो अपनों से धोखा खाता है उसे दूसरों पर भरोसा नहीं होता। राजा सूरत ने उसे सांत्वना देते हुए कहा कि जब अच्छा दिन था तो बुरा दिन आया, आज बुरा दिन है तो कल अच्छा दिन भी आएगा। चलो संत के पास चलते हैं और दोनों ऋऋषि सुनिधा के पास गए। सभी परिस्थितियों से अवगत कराकर ऋषि से रास्ता बताने का निवेदन किया। ऋषि ने कहा कि दुख तो देवता भी भोगते हैं इसलिए संकट से घबराना नहीं चाहिए और उन्होंने परांबा जगदंबा की उपासना करने का उपाय बताते हुए कहा कि नवरात्रि पर्व में जो व्यक्ति मां परांबा जगदंबा की उपासना करता है उसके सभी संकट दूर होते हैं। व्यास पीठ से श्री तिवारी ने देवी के विभिन्न रूपों का विस्तार से वर्णन करते हुए शुंभ निशुंभ और रक्तबीज उद्वार कथा का भी बखान किया।

