बालोद / हाशिम कुरैशी
दल्ली राजहरा – सर्वप्रथम डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के के छायाचित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित किया गया। तत्पश्चात त्रिशरण पंचशील का पाठ किया गया। समाज के अध्यक्ष अशोक बांबेश्वर के द्वारा भारत के संविधान का प्रस्तावना का वाचन किया गया। बांबेश्वर ने कहा की बाबा साहब अंबेडकर ने संविधान सभा में मसौदा पेश करते हुए कहा था कि संविधान चाहे कितना ही अच्छा क्यों न हो, यदि उसे लागू करने वाले लोग अच्छे नहीं हो तो संविधान जरूर बुरा साबित होगा और यदि लागू करने वाले लोग अच्छे होंगे तो संविधान भी हितकारी साबित होगा। 26 जनवरी 1950 से हम* *विषमताओं के जीवन में प्रवेश करने जा रहे हैं। राजनीति में हमें समानता का हक होगा लेकिन सामाजिक आर्थिक जीवन में विषमता यानी* *असमानता बनी ही रहेगी। राजनीति में हम एक व्यक्ति, एक वोट और एक मूल्य को मान्यता देंगे लेकिन हमारे सामाजिक और आर्थिक ढांचे के कारण हम सामाजिक और आर्थिक जीवन में एक वोट, एक मूल्य के सिद्धांत को नकारेंगे। आखिर कब तक हम सामाजिक और आर्थिक जीवन में समानता को अस्वीकार करते रहेंगे? यदि हम लंबे समय तक इसे नकारते रहेंगे तो हम हमारे राजनीतिक लोकतंत्र को भी खतरे में डालेंगे। हमें इन विषमताओं को जितना जल्दी हो सके समाप्त कर देना चाहिए। यदि ऐसा नहीं किया गया तो जो लोग भेदभाव, शोषण व विषमताओं के बुरी तरह से शिकार है, वे राजनीतिक लोकतंत्र की उस व्यवस्था को ही,जलाकर राख कर देंगे। जिसे इस संविधान सभा ने कड़ी मेहनत से बनाया है।इस अवसर पर हेमंत कांडे, बी.एल. बौद्ध,गोरे लाल बंबेश्वर, सुरेंद्र मेश्राम, किशोर कुमार बंबेश्वर ,कमलकांत रामटेके,संतोष सहारे ओमप्रकाश रामटेके, अनिल रामटेके, दिलीप रंगारी, नरोत्तम मेश्राम, सत्य विजय बांबेश्वर,विशाल दसोडे, जितेंद्र मेश्राम नोमेश रामटेके, रमेश भगत, चंद्र रेखा नंदेश्वर, शारदा बांबेश्वर, चंद्रशिला बांबेश्वर, रानू रामटेके, शीला दसोडे,निर्मला शुक्ला ज्ञानेश्वरी खोबरागड़े,निर्मला भगत ,दृश्य रामटेके,मान्य दसोडे ,शालिनी रंगारी, भावना दसोडे,अनीता बंबेश्वर, गुलमां मेश्राम, अमृता डोंगरे एवं बौद्ध उपासक उपासिकाओं उपस्थित थे।

