उपनिदेशक की सोच के चलते खतरे में छत्तीसगढ़ का प्रसिद्ध इंद्रावती टाइगर रिजर्व।

धड़ल्ले से कट रहे जंगल खतरे में वन्यप्राणियों का अस्तित्व।

इंद्रावती टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक संदीप बलगा ने कहा कि बीजापुर के विकास के लिए इंद्रावती टाइगर रिजर्व का विनाश जरूरी , पेड़ कटेंगे तभी विकास होगा , रायपुर भी पहले जंगल था।

ईश्वर सोनी बीजापुर

बीजापुर -: देश एंव प्रदेश का प्रसिद्ध इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान का अस्तिव खतरे में है , इस राष्ट्रीय उद्यान पर अब भू-माफियो सहित सागौन तस्करों एंव शिकारियों की नजर पड़ गई है जिसके चलते लगातार धड़ल्ले से जंगल को काटा जा रहा है   कई बाहर के शिकारी आकर वन्य प्राणियों का शिकार भी कर रहे है और कई बार पकड़े भी गए।

    इन सब मुद्दों को लेकर जब मीडिया की टीम ने इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान के उपनिदेशक संदीप बल्गा से चर्चा की तो उन्होंने कहा कि हम क्या कर सकते है बीजापुर के विकास के लिए जंगल तो कटेंगे ही , पहले रायपुर भी जंगल था पेड़ काटे गए तो शहर बना वैसे ही बीजापुर में भी होगा ।  उपनिदेशक संदीप बलगा शायद भूल गए कि इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान वन्य जीवों के संरक्षण के लिए बना है और यंहा कई दुर्लभ जंगली जानवर है जिनका सरंक्षण करने के लिए है 1975 में केंद्र सरकार ने इसकी स्थापना की थी।

     लेकिन अब इस इंद्रावती टाइगर रिजर्व पर भूमाफियाओं की नजर पड़ गई है जो अब तक लगभग 2000 एकड़ से ज्यादा जंगल को काटकर खेत बना चुके है लेकिन विभाग पूरी तरह से चुप्पी साधे बैठा है । कई बार आरोप लगे कि विभाग के अधिकारी है लाखो रुपये की लेनदेन कर भूमाफियो को कब्जा करने के लिए बढ़ावा दे रहे है।

क्या है इंद्रावती टाइगर रिजर्व

इंदरावती राट्रीय उद्यान बीजापुर जिले में स्थित है , इस राष्ट्रीय उद्यान का नाम बस्तर की प्राणदायिनी इंद्रावती नदी के नाम पर रखा गया है जो इस उद्यान से होकर बहती है एवं छत्तीसगढ एवं महाराट्र की सीमा बनाती है , राष्ट्रीय उद्यान का कुल क्षेत्रफल 2799.08 वर्ग कि.मी. है एवं इसकी स्थापना सन्‌ 1975 में हुई एवं इसे प्रोजेक्ट टाईगर के अंतर्गत भी शामिल किया गया है। इस राष्ट्रीय उद्यान के अंदर 56 राजस्व ग्राम स्थित है जिनमें गौंड ,हलबा , माडिया मुरीया आदि जन जाति के लोग निवास करते है।इस संरक्षित क्षेत्र में सागौन एवं मिश्रित प्रजाति के वन पाये जाते है जिनमें 102 प्रकार के वृक्ष 28 प्रकार की लताऐं 46 प्रकार की झाडियां ,बांस एवं ब्रायोफाईट पाये जाते है। इस क्षेत्र में – सागौन , शीशम , साजा , सलई , हल्दू , सेन्हा, तिनसा , जामुन , तेन्दू , धावडा , बीजा, साल , चारके पेड़ भरपूर मात्रा में है, इसके अतिरिक्त यंहा के जंगलो में शेर , तेन्दूआ, वन भैंसा नीलगाय , चीतल , सांभर , बारहसिंगा , हिरन, भालू , जंगली सुअर गौर मोर आदि वन्यप्राणी इस राष्ट्रीय उद्यान में देखें जा सकते है इसके अलावा जंगली भैंसों की दुर्लभ प्रजाति यंहा देखी जाती है जिसके बचाव के लिए विभाग ने विशेष प्रबंधन भी किये है।

टाइगर के लिए अनुकूल है इंद्रावती : इन्द्रावती टाइगर रिजर्व बाघों के रहवास के लिए उपयुक्त स्थल है. जहां बाघ के अलावा अन्य वन्यजीव भी निवास करते हैं. जिसमें मुख्य रूप से वन भैंसा जो छत्तीसगढ़ राज्य का राजकीय पशु यहां पाया जाता है. साथ ही गौर, तेन्दुआ, भालू, नीलगाय, हिरण, सांभर, जंगली सुअर जैसे वन्यप्राणियों का भी यह रहवास स्थल है. छत्तीसगढ़ के इन्द्रावती टाइगर रिजर्व 2799.08 वर्ग कि.मी. के भौगोलिक क्षेत्र में फैला हुआ है. जो महाराष्ट्र और तेलंगाना के वनक्षेत्र से लगा हुआ है. जो बाघों के विचरण के लिए उपयुक्त कॉरिडोर का काम करता है।