धूमधाम से मनाई गई राज राजेश्वर सहस्त्रबाहु अर्जुनदेव की जयंती।

भूपेन्द्र सिन्हा 

छुरा :– प्रांतीय समाज के आवाहन पर प्रत्येक गांव में राजराजेश्वर भगवान सहस्त्रबाहु देव अर्जुन जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इसी बीच ग्राम टेंगनाबासा में जो कि यहां 75 परिवार से ज्यादा कलार समाज के लोग निवासरत है, जिनके द्वारा बड़े ही धूमधाम से राजराजेश्वर भगवान सहस्त्रबाहु अर्जुनदेव की जयंती मनाई गई, ग्राम के सामाजिक भवन में कथा पूजन का आयोजन अपने इष्टदेव की पूजा अर्चना किया, तत्पश्चात पूरे गांव में समाज के माताओं द्वारा कलश यात्रा निकाला गया।

समाज के मुखिया श्री हरीराम सिन्हा ने इस पुनीत अवसर पर समस्त स्वजातीय समाज को शुभकामना प्रेषित करते हुए कहा कि कार्तिक मास शुक्ल पक्ष सप्तमी तिथि को महिष्मती साम्राज्य के अधिपति सहस्त्रबाहु देव अर्जुन का अवतरण हुआ। श्रीमद् भागवत कथा पुराण एवं वाल्मीकि रामायण के अनुसार वे श्रीहरि विष्णु के 24 वे अवतार थे। हैहयवंश के दसवीं पीढ़ी में महाराज हैहय एवं माता पद्मिनी के संतान के रूप में प्राकट्य हुआ। उन्होंने भगवान दत्तात्रेय नारायण की कई वर्षों तक कठिन तपस्या की, जिसके फलस्वरूप एक हजार हाथ का वरदान मिला। महाप्रतापी सहस्त्रबाहु देव, राजराजेश्वर, कार्तवीर्य, सहस्त्रार्जुन की उपाधि से विख्यात हुए।

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मोहेंद्र सिन्हा ने कहा कि हमारे इष्ट देव सहस्त्रबाहु देव अर्जुन ने त्रिलोक विजयी दशानन रावण को हराकर बंदी बनाया था। वे सुदर्शन चक्रावतार, सप्तद्रविपाधी, दसग्रीव विजयी थे। धन,यश, कीर्ति, बल के देवता हैं। वे अखंड भारतीय संस्कृति के विस्तारक थे। उन्होंने सात महाद्वीपों एवं ब्रह्मांड पर विजय प्राप्त कर धर्म परायण राजा के रूप में 85 हजार वर्षों तक शासन कर हैहयवंश का धर्मध्वजा लहराया। इसी कारण राजराजेश्वर सहस्त्रबाहु देव अर्जुन कलार, कलाल, कलवार समाज के इष्ट देव के रूप में पूजे जाते हैं।

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