धान खरीदी एवं चावल वितरण मे सुखत की मांग होगा प्रमुख मुद्दा।
वेतन अनुदान की मांग भी शामिल।
जिले के आधे से ज्यादा उचित मूल्य की दुकाने पर होगी तालेबंदी धानखरीद की प्रारम्भिक तैयारी होगी प्रभावित।
प्रमोद दुबे
महासमुंद – शौख नहीं मजबूरी है ये हड़ताल जरूरी है… इन्ही नाराओ के बीच सहकारी समिति में कार्यरत कर्मचारियों ने अपने 3 सूत्रीय मांगों को लेकर धमतरी गाँधी मैदान मे अनिश्चितकालीन हड़ताल मे महासमुंद के कर्मचारी शामिल हुए.कर्मचारियों मुताबिक मध्यप्रदेश की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी प्रत्येक समिति को प्रति वर्ष 3-3 लाख रुपए प्रबंधकीय वेतन अनुदान राशि प्रदान करने, सेवानियम 2018 में आंशिक संशोधन करते हुए पुनरीक्षित वेतनमान लागू करने और समर्थन मूल्य पर धान खरीदी वर्ष 2023-24 में धान संग्रहण के बाद हुई संपूर्ण सूखत को मान्य करते आगामी वर्ष के लिए धान खरीदी नीति में 16.9 मे 3%फीसदी सूखत मान्य का प्रावधान करने की मांग की गई है। दुसरी तरफ मौजूदा राज्य शासन द्वारा प्रदेशभर में 14 नवंबर से किसानों के समर्थन मूल्य पर धान खरीदी प्रारंभ करने की तैयारी मे जुटी हुआ है ।

छत्तीसगढ़ सहकारी समिति कर्मचारी महासंघ के आव्हान पर प्रदेशभर की सहकारी समिति के लगभग 13 हजार कर्मचारियों ने अपने 3 सूत्रीय मांगों को लेकर शासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र साहू एवं महासमुंद के कर्मचारी संघ नेता जयप्रकाश साहू का कहना है, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा एक तरफ जहां प्रदेश की सहकारी समितियों में 14 नवंबर से धान खरीदी प्रारंभ करने की तिथि घोषित की गई है, वहीं दूसरी ओर विडंबना ये है कि पिछले साल की धान खरीदी का कमीशन अब तक नहीं मिला। बारदाना की राशि, ब्याज अनुदान की राशि अभी तक समितियों को प्राप्त नहीं हुई है। इसके कारण जिले के समितियों मे कर्मचारियों को वेतन की लाले पड़े है संघ के पदाधिकारियो का ये भी कहना है कि लंबित मांगों के संबंध में प्रदेश के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, वित्त मंत्री, खाद्य मंत्री सहित सहकारिता सचिव को ज्ञापन सौंपकर ध्यानआकर्षित करा चुके हैं, इसके बाद भी शासन प्रशासन द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। धान खरीदी नीति का बनाई जा चुकी है , जिसमें 72 घंटे में धान उठाव का प्रावधान था, उसे हटा दिया गया है।तथा धान खरीदी के एक माह बाद 31मार्च तक परिवहन हेतु नीति बनाई गई है जो समिति के हित मे बिलकुल भी नहीं है महासंघ के पदाधिकारियों ने जनदर्शन में भी मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को मिलकर कहा गया कि धान खरीदी में सूखत नहीं तो धान खरीदी का बहिष्कार किया जाएगा, पर अभी तक इस दिशा में कोई भी पहल सरकार द्वारा नहीं की जाता दिख रहा है.जिसका आक्रोश प्रदेश के लगभग 13 हजार कर्मचारी समिति प्रबंधक, लिपकीय सहायक, लिपिक आपरेटर, विक्रेता,प्रोसेसरवर,चपरासी, चौकीदार में गहरा असंतोष व्याप्त है।इनके द्वारा लंबित मांग पूरी नहीं होने के कारण कल 4 नवंबर से सहकारी समितियों के कर्मचारी अनिश्चितकालीन आंदोलन पर चले जाएंगे।सहकारी समिति कर्मचारियों के हड़ताल से प्रदेश में समर्थन मूल्य मे धान की खरीदी, रबी फसल के ऋण वितरण, 60फीसदी उपभोक्ता उचित मूल्य की दुकानों से राशन वितरण प्रभावित होगा।
4 नवंबर से अनिश्चितकालीन आंदोलन रायपुर के तूता धरना स्थल पर प्रदर्शन की अनुमति नहींमिली इसलिए संभाग स्तर पर धरना प्रदर्शन का निर्णय संघ द्वारा लिया गया है.धमतरी के गाँधी मैदान स्थित धरना प्रदर्शन मे महासमुंद के कर्मचारी शामिल होंगे।
