आध्यात्मिक ज्ञान से ही संभव हो रहा दहेज प्रथा जैसी कुरीति का खात्मा।

कमल सिंह लोधा 

ग्वालियर:– दहेज एक सामाजिक कुप्रथा है ।इसकी रोकथाम के लिए सरकार भी निरंतर कार्यरत है , फिर भी इस प्रथा का अंत नहीं कर पा रही है। वही देखा जाए तो संत रामपाल जी के अनुयाई ना दहेज लेते हैं, व देते हैं। बीते दिन मध्य प्रदेश के जिला ग्वालियर की तहसील भितरवार में संत रामपाल जी के अनुयायियों द्वारा एकदिवसीय विशाल जिला स्तरीय आध्यात्मिक सत्संग का आयोजन एलईडी के माध्यम से किया गया एवं इसी सत्संग में एक दहेज मुक्त विवाह भी संपन्न हुआ। जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु जन सत्संग सुनने एवं इस अनोखे विवाह को देखने के लिए आए हुए थे। यह विवाह भगत राहुल दास तहसील भितरवार निवासी का ग्राम गिरवई निवासी वर्षा दासी के साथ संपन्न हुआ। इस विवाह में किसी भी प्रकार की कोई ताम-झाम देखने को नहीं मिली। ना कोई बैंड बाजा, ना घोड़ी बाराती सिर्फ 17 मिनट में गुरु वाणी से यह विवाह संपन्न हुआ। दूल्हा-दुल्हन का कहना है- “यह शिक्षा उन्हें उनके गुरु जी संत रामपाल जी ने दी है”।संत रामपाल जी के आध्यात्मिक ज्ञान के माध्यम से इस कुरीति का खात्मा संभव हो रहा है। संत रामपाल जी के अनुयायियों का कहना है “दहेज प्रथा एक ऐसी कुरीति है जो हमारे समाज को कमजोर बनाती है।” इसके बजाय हमें आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाना चाहिए। जो हमें सच्ची खुशी और शांति प्रदान करते हैं। संत रामपाल जी से नाम उपदेश लेने वाले लाखों परिवारों ने दहेज प्रथा को छोड़ने का फैसला किया है लोग अब आध्यात्मिक ज्ञान को अपना कर अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने की दिशा में बढ़ रहे हैं ।संत रामपाल जी महाराज दहेज प्रथा ही नहीं बल्कि समाज में व्याप्त बुराई जैसे नशा मुक्त, चोरी डकैती, रिश्वतखोरी आदि बुराइयों को भी जड़ से खत्म करने में निरंतर कार्यरत है।