हर राज्य से श्रद्धालु हजारों की संख्या में मथा टेकने पहुंचते हैं ।
प्रमोद दुबे
महासमुंद:– आदि शक्ति मां दुर्गा की उपासना का पर्व नवरात्रि धूमधाम से मनाया जा रहा है देवी मंदिर सार्वजनिक पंडालों में विराजित मां दुर्गा के विभिन्न रुपो की पूजा अर्चना की जा रही है जिले मे माता के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक जंगल और पहाड़ों के बीच स्थित घुचापाली माँ चण्डी मंदिर है यहां नवरात्र के दिनों में दूसरे प्रदेश से भी हजारों श्रध्दालुओ मनोकामना लेकर माता के दरबार में माथा टेकने पहुंच रहे हैं, ज्ञात हो की बागबहरा के ग्राम घुचापाली स्थित माता चंडी का यह मंदिर जंगलों और पहाड़ों के बीच स्थित है माता का ये मंदिर प्रकृति के मनोरम दृश्यों के बिच मजबुत होने के करण भक्तों के लिए आस्था और आकर्षण का केंद्र है बागबाहरा के घुचापाली के जंगल के बिच माता चंडी पहाड़ी श्रृंख़ला पर भव्य मंदिर विराजित है मंदिर में पत्थर की 23 फिट ऊंची मां चंडी देवी की अदभुत प्रतिमा है,जो मैं नागरिक रूप से मानव आकृति ली हुई है दक्षिण मुखी यह स्वयंभू मूर्ति दुलर्भ.एव तंत्र साधना के लिए प्रसिद्ध है नवरात्रि के दिनों में प्रतिदिन हजारों श्रधालुओ का वाह ताता लगा रहता है मंदिर के पुजारी राम जी तिवारी चंडी ट्रस्ट के सलाहकार दानवीर शर्मा बताते हैं की माता का ये मंदिर करीब 200 साल पुराना है जहां माता के मूर्ति स्वयं-भू है, जो पहले आकार में छोटी थी लेकिन धीरे-धीरे बढ़ते हुए आज करीब 23 फिट हो गई है ।
पहले यह मंदिर वनांचल होने के कारण लोगों के पहुच से दूर था, जहां ऋषि मुनि और लोग साधना करने आते थे ! 1994 मे वह मंदिर का निर्माण हुआ तब से अब तक यह दोनों नवरात्रि का पर्व यहाँ महोत्सव के रूप में मनाया जाता है वाह माता के दरबार में भक्त न केवल अपनी मनोकामना लेकर आते हैं बाल्की अपनी मनोकामना ज्योति कलश भी जलते हैं मां के दरबार में सच्चे मन से की गई प्रार्थना माता चंडी जरूर पूरी करती है मां के दरबार मे आने वाले सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।
चंडी मां पर बढ़ रही भक्तों की आस्था
मां चंडी ट्रस्ट के नंद कुमार चंद्रकन्या बताया मां चंडी की महिमा दूर-दूर तक फैली हुई है ! माँ के दरबार में है वर्ष मनोकामना ज्योति कलश बढकर 7500 हो गयी है माता के दरबार में मत्था टेकने दूर-दूर से श्रद्धालू पहुंच रहे हैं श्रद्धालूओं के लिए भोजन, विश्राम, रात्रि विश्राम आदि की समुचीत व्यवस्था की गई है भंडारा से प्रतिदिन करीब 35 हजार श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते हैं
घंटी बजने पर पहुंचते हैं भालु
जितनी अद्भुत यहाँ की माता की प्रतिमा उतनी ही अद्भुत है रोजाना यहां आने वाले भालूओ की कहानी है,, जो रोजाना माता के दरबार में किसी भी समय पाहुंचते हैं इनकी संख्या पांच होती हैं जैसे ही मंदिर की घंटी बजती है भालू मंदिर का रुख कर लेते हैं इन भालू को देखकर श्रद्धालू पहले डर कर डर भाग जाते थे, पर अब लोग इन भालुओ से डरने के बजाये, श्रद्धालू अपने हाथ से प्रसाद, नारियल खिलात हैं भालू किसी को नुकसान न पहुंचाते इसके लिए मंदिर ट्रस्ट व वन विभाग ने सुरक्षा का इंतजाम किया है!
