”जटिल पूजा-पाठ के बजाय सरल स्वभाव, दया व मन की शुद्धि को ही भक्ति मानना”
सुश्री सरोज कंसारी ”दया से बड़ी कोई पूजा नहीं होती, सरल स्वभाव में बसती गंगा ईश की। सेवा के लिए सदा प्रयत्न करो मनुज, प्रार्थना समझकर सेवा को करते चलो।” हमने यह अनुभव किया है कि कभी-कभी ईश्वर को मंदिर की मूर्तियों से कहीं अधिक किसी भूखे की थाली में, किसी के आँसू पोंछते हुए…
