महिला समूह की गायत्री साहू गढ़ रही आत्मनिर्भरता की कहानी।
राजिम :- मायका ई-रिक्शा से पहुंची पथर्रा की बेटी गायत्री साहू पंडित सुंदरलाल शर्मा चौक के पास बस स्टैंड में सवारी बिठाकर आगे बढ़ रही थी इन्हें देखकर हर कोई यही कह रहे थे कि अब महिला अबला नहीं बल्कि सबला है। ड्राइवर का काम सिर्फ पुरुष करते हैं इस परंपरा को 21 वीं सदी…
