विषय-रघुकुल सी नहीं यहां रीति-रिवाज।
कविता ———————————————- नारी के वजूद पर उठता हैं कई सवाल अंनत वेदनाओ की नहीं रखते खयाल होता आया है हर युग में ही अत्याचार सहनशीलता संयम उनकी बेमिसाल। साधु वेश में घूमते कई रावण यहां हर दिन होता हरण बेगुनाह सीता का पूर्ण सुरक्षा का बना नहीं अब तक ढाल हर पुरुष को कहां हैं…
