कुण्ठाओं की गांठें तोड़ो, मन में कभी न बांधो।
शीर्षक- गाँठ “”””””””””””””””””” कुण्ठाओं की गांठें तोड़ो, मन में कभी न बांधो। सही बात स्पष्ट कहो नित, जीवन अपना साधो।। झूठी क़समों और वादों के, चक्कर में मत पड़िये। कभी न मन में गांठ बांधकर, लड़िये और झगड़िये।। 🌹💥🌸🌻🔥🌺🌿🌷 उर में सात्विक भाव रखो नित , मन को शुद्ध बनाओ। नेक राह पर चलो हमेशा,…
