झन काटो रुख ल
झन काटो रुख ल ——–//——-//—– झन काटो रुख ल,भोगे ल पड़ही न दुख ल| सब मनखे ल बतावव,रुख-राई के सुख ल|| मौहा ल काटबे त, पान-पतरी कहाँ ले पाबे| लइका बर,कमरछठ देवता ल,कइसे मनाबे|| दोना पतरी बिन पूजा के,कइसे पाबे सुख ल- पिकरी ल काटबे झन,तै छइंहा ल कहाँ पाबे| तिहि बता दे लक्ष्मीनारायण ल…
