भारतीय संस्कृति पूरे विश्व मे अपनी गौरवशाली परंपरा को निर्वहित करते हुए आगे बढ़ती है जहां हर माह के अलग-अलग महत्व और व्रत वा त्यौहार है सभी त्यौहार का कहीं ना कहीं एक अलग ही महत्त्व हैँ भारत को एकता के सूत्र मे बांधने का प्रयास करती है और इन्हीं प्रयासों में से विभिन्न त्यौहारों को मनाते हुये हम लोग आगे बढ़ते हैं और देश और संस्कृति की रक्षा उसकी अस्मिता के लिए संकल्प लेते हुए हम विभिन्न भाषा भाषी के होते हुये भी कहीं न कंही भारत मे अनेकता में एकता की भाव को दिखाते हैँ और उसे सदैव जीवित रखने का प्रयास करते हैं इसी परंपरा मे भारतीय संस्कृति में रिश्तों के विशाल परंपरा है जिसमें दादा-दादी बेटा-बेटी सहित एक बड़े परिवार की संयुक्त परिवार की संकल्पना को समृद्ध करती है भिन्न-भिन्न धर्म संप्रदाय के होते हुए भी हम सब चाहते हैं कि हमारा देश महान बने और हमारी संस्कृतिक विरासत का सदैव हस्तांतरण पीढ़ी दर पीढ़ी होता रहे I पौराणिक कथाएं के माध्यम से परिवार मे आपसी रिश्तों का एक बहुत बड़ा तना-बाना बना हुआ है जिसके तहत देश और समाज समृद्ध होते हुए आगे बढ़ता है और अपने साथ-साथ पूरे समुदाय को भी आगे बढ़ने का प्रयास करती है ऐसे ही एक सांस्कृतिक पर्व है रक्षाबंधन I भाई बहनों के रिश्तो मे चार चाँद लगाने ने का प्रयास करता का एक पर्व है जिसे रक्षाबंधन के भी नाम से जानते है I नाम से ही स्पष्ट है की रक्षा मतलब नहीं सुरक्षा का भाव, संवेदना का भाव I भारत की सांस्कृतिक संकल्पना है की विभिन्न त्योहारों के माध्यम से अनेक प्रकार के संस्कार बच्चों के अंदर रोपित किये जाये जिससे वह अपनी संस्कार कों अपनाते हुये अपने जीवन कौशल मे उतरोत्तर सुधार कर सामाजिक दायित्यो का निर्वहन आसानी से कर सके I
हमारी संस्कृति मे रीति रिवाज और अलग अलग मौसम के माध्यम से लोगों को आपस में जोड़े रखने और उसकी निरंतरता बनाये रखने हेतु विभिन्न तरह के कि त्योहारों का सृजन किया गया और इसे जनमानस मे धीरे से प्रतिको के रूप मे अपनाया गया और यही सामाजिक धरोहर के रूप मे प्रचलित है और आज तक अनुकरणीय है ऐसे ही सांस्कृतिक परंपरागत राखी का त्योहार जो भाई बहनों के अटूट प्रेम और संवेदना को स्पष्ट करने का त्यौहार श्रावण मास की पूर्णिमा को रक्षाबंधन का पर्व पूरे भारत में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है जिसमें भाई अपनी बहनों की प्रतीक्षा करती हैँ और भाई लोग इस त्यौहार का का इंतजार करते है I
इस दिन रक्षा सूत्र के रूप में राखी को रक्षा सूत्र के रूप मे भाई की कलाई पर बांध कर अपने अपनत्व और प्रेम के मर्म को परिभाषाति करते हुये दिखाई देता है ऐसी एक पौराणिक कथा है एक बार भगवान श्री कृष्ण की सुदर्शन चक्र से उंगली कट जाने पर उसकी मुँह बोली बहन द्रोपदी जी ने अपने साड़ी के पल्लू को फाड़ कर फाड़ करके उसके उंगलियों पर बांध दिया था और साथ श्री कृष्ण सदा ही उसे अपनी छोटी बहन के रूप मे मानकर उसकी रक्षा किये जिसका उदाहरण है महाभारत का चीरहरण के समय चिर हरण के समय उसकी सतत वस्त्र प्रदान करके द्रोपदी की रक्षा की थी आपसी रिश्तों को संजोकर रखने का त्यौहार रक्षाबंधन और इसकी वजह से आपसी और पारिवारिक जीवन में कितने भी उतार चढ़ाव आये भाई बहन की बहन भाई की मदद करता है छोटे बड़े का इसमें भेद मिटाते हुए जो भाई-बहन आपस में बचपन में खूब लड़ते थे वही बड़े होकर इस दिन को याद करते करते हुये प्रसन्न होते है
जब तक जीवन रहते है तब तक भाई बहन का स्नेह बना रहता है भाई बहन के प्रेम का है या पर्व है रक्षाबंधन के माध्यम से संस्कृति और समाज को एक नई दिशा देता है हमारे संस्कार और हमारे संस्कृति आज भी उतने ही प्रासंगिक है जितने पहले हुआ करता था रक्षाबंधन आपसी श्रद्धा और विस्वास का पर्व जो की एक भाई और बहन के बीच में आपस मे सम्मान विकसित करता है भाई बहन जब से दुनिये आते तब से रक्षाबंधन के लिए उतना ही प्रेम और आत्मीयता रहता है यह एक सच्चाई है कि हम कुछ भी कर ले लेकिन इस महान परंपरा को हम कभी तोड़ नहीं सकते और अपने आपसी भाई बहन के प्रेम को कभी भूल नहीं सकते वही यह त्यौहार लड़के लड़कियों को मर्यादा में रहने का भी भाव सिखाती है की समाज में किस तरह से जीना और कैसे व्यवहार करना है और किस तरह से अपने आप को विकसित करते हुये जीवन यापन करना है I
वर्तमान सन्दर्भ मे इस पर्व के माध्यम से भी संदेश पहुंचाना चाहते हैं कि हर स्त्री को माँ या बहन की दृष्टि से देखें और उसी तरह महिलाओं के लिए भी और लड़कियों के लिए भी यही संदेश देना है की पराये पुरुषो और लड़को भाई और पिता की नजर से ही देखें तभी संस्कार और संस्कृति का विकास हो सकेगा. एक बहन रक्षा सूत्र बांधते समय केवल अपनी रक्षा का भाव नहीं रखते अपितु समाज में जितनी भी बहन है सबकी रक्षा करना चाहती है उनकी समाज में प्रतिष्ठा को बनाए रखना चाहती है यही रक्षाबंधन का सही गिफ्ट होगा एक भाई के लिए बहनो के लिए I
