विजय मजूमदार
पखांजूर – पारोल कोट और कांकेर जिले के अंतिम छोड़ पे बसा ग्राम ढोड़कट्टा का टुटा पुलिया बिगत 10 बर्षो से अपनी ब्याथा ब्यान करती आ रही है ग्रामीणों द्वारा कोई बार शासन प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किए है परेंन्तु सत्ता मे मदहोश हुए राजनीती से जुड़े हुए लोगो ने नगर पंचायत को छोड़ कभी ग्रामीण क्षेत्र जहाँ वोट बैंक ज्यादा न हो या वोटर की शांखा अधिक न रही हो वहा किसी मुलभुत सुबिधा को उपलब्ध करने मे विशेष रूचि नहीं दिखाई दे रही है क्षेत्रीय बिधायक बिक्रम उसेंडी जी के संसदीय कार्यकाल मे ढोड़कट्टा पुलिया क्षतिग्रस्त होकर नई पुलिया का मांग पैसारे पड़ा है कभी उसेंडी जी ने ढोड़कट्टा पुलिया और नविन स्कुल भवन निर्माण के मांग को गंभीरता से नहीं लिए भोजराज जी बिधायक रहे उन्होंने भी अपने ईद गिद रहने वाले छुटवाई नेताओं के मांगो को ही पूरा करते रहे क्षेत्र मे अनूप नाग ने ढोड़कट्टा जैसे अंदरूनी क्षेत्र मे जनता के मुलभुत सुबिधा को प्रथमिकता देते हुए 10 लाख का पुलिया की तकनिकी स्वीकृति प्रदान किए थे परन्तु चुनाव परिणाम भाजपा के पक्ष मे होने के बाद क्षेत्र के तमाम मुलभुत मांगो को दरकिनार कर दिया गया और ढोड़कट्टा स्कुल और एकमात्र पहुंच मार्ग पे बने क्षतिग्रस्त पुलिया के निर्माण को रोक दिया गया जिससे आज सेकड़ो लोग पड़ेशानी का सामना कर रहे है बिक्रम उसेंडी जी के पास ढोड़कट्टा पुलिया का 10 लाख का तकनिकी प्रतिबेदन पंचायत के प्रस्ताव सहित लगभग 6 माह से स्वीकृति के मुहर के लिए इंतजार मे है उसके बावजूद भी आधोसनरचना फण्ड से बिधायक जी के अनुशंसा से कड़ोरो के निर्माण कार्य की स्वीकृति हुई है जिसमे दुर्भाग्य से ढोड़कट्टा स्कुल और पुलिया का कही कोइ जिक्र नहीं है ऐसे मे बिकास का झूठा ढिंढोरा पीटते भाजपाईओ को हकीकत के धरातल पे खयालो की आसमान से एक बार उतारकर जमीनी हकीकत को देखने की आवशयकता है।
