स्मार्ट मीटर योजना गरीबों के हित में नहीं, अंधेरे में रहने हो जाएंगे मजबूरः निखिलकांत ।

प्रमोद दुबे 

महासमुंद – युवा कांग्रेस प्रदेश महासचिव व नगर पालिका सभापति निखिलकांत साहू ने स्मार्ट बिजली मीटर योजना को षड्यंत्र पूर्वक सरकार द्वारा बिजली क्षेत्र के निजीकरण और इसे कारपोरेट कंपनी को सौंपने की मुहिम का हिस्सा बताया है। श्री साहू ने कहा कि पूरे देश से आ रही रिपोटों से स्पष्ट है कि स्मार्ट मीटर की संरचना इस तरह डिजाइन की जा रही है कि वे डिजिटल मीटर से ज्यादा तेजी से चलते हैं और वास्तविक खपत से ज्यादा दर्ज करते हैं। इस प्रकार ये मीटर उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डालने वाले साबित हो रहे हैं। अतः इन स्मार्ट मीटरों की उपयोगिता और उपादेयता संदेह के दायरे में है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटरों को पहले चार्ज कराना होगा।इससे स्पष्ट है कि जो गरीब पहले जेब से पैसे खर्च करने में असमर्थ होंगे, वे अंधेरे में रहने को मजबूर होंगे। इसके साथ ही बिजली की दरों को तय करने में नियामक आयोग की भूमिका खत्म हो जाएगी और बिजली दरों को कभी भी बढ़ाया जा सकेगा। इससे आम जनता की बदहाली और बढ़ेगी। इस प्रकार, यह योजना राज्य में अंधकार युग की दस्तक साबित होगी। उन्होंने कहा कि हिन्डेनबर्ग रिपोर्ट से साफ है कि अपने मुनाफे के लिए निजी कारपोरेट कंपनी किस तरह की व्यावसायिक जालसाजी कर रही है और आम जनता की जेब में डाका डाल रही है। छत्तीसगढ़ में बिजली क्षेत्र में कारपोरेट कंपनियों का प्रवेश आम जनता के लिए संकट का कारण बनेगा। उत्तरप्रदेश एवं विभिन्न प्रदेशो के अनुभव से स्पष्ट है कि यदि निजी हाथों को स्मार्ट मीटर लगाने का टेंडर मिलता है, तो राजस्व पर हजारों करोड़ रुपयों से अधिक का अतिरिक्त भार खजाने पर पड़ेगा, जो भविष्य में आम जनता से ही वसूले जाएंगे। उन्होंने कहा कि बिजली राज्य का विषय है और केंद्र सरकार की इसमें दखलंदाजी स्वीकार नहीं की जानी चाहिये, लेकिन राज्य में कथित डबल इंजन की सरकार केंद्र के रिमोट पर चलकर एक उद्देश्य बना लिया है कि बिजली क्षेत्र में निजीकरण की मुहिम को बढ़ाना और इसे अडानी जैसे अन्य कारपोरेट कंपनी को सौंपना।