प्रमोद दुबे
महासमुंद- जिले की अनेक ग्राम पंचायतें ऐसी भी हैं, जहां बड़े-बड़े असंवैधानिक कारनामे हो रहे हैं और उच्च अधिकारियों का संरक्षण ऐसा कि वे सब प्रमाणित होते हुए भी पंचायती राज अधिनियम की धज्जियां उड़ाते हुए अपना खुद का संविधान बनाकर आरोपी को विशेष कर्मी का दर्जा देकर उनके साथ किसी वीआईपी की तरह व्यवहार किया जा रहा है। उक्त रवैया का अंजाम यह हो रहा है कि अब जिला जनपद व ग्राम पंचायतों के अधिकांश कर्मी पंचायती राज अधिनियम नहीं, खुद के अनुसार अधिनियम बनाकर मामला निपटा रहे हैं। ताजा मामला जनपद पंचायत पिथौरा का है। इस जनपद पंचायत व तहसील कार्यालय की बाउंड्री से लगाकर नगर पंचायत द्वारा करीब 5 वर्ष पूर्व बनाए गए सुलभ शौचालय को खोलकर उसका उपयोग शुरू नहीं किया गया है, पर एक और सुलभ शौचालय जनपद पंचायत द्वारा एक ग्राम पंचायत गोपालपुर को कार्य एजेंसी बनाकर इसे एक ठेकेदार के माध्यम से बनवाया जा रहा है। जिसे देखकर आस-पास के रहवासी कर्मचारी भी आश्चर्य में हैं कि 5 वर्ष पूर्व बनाए गए शौचालय को कथित रूप से आवश्यकता न होने पर चालू नहीं किया जा सका है, बावजूद उक्त शौचालय के चंद कदमों पर दूसरा शौचालय निर्माण क्यों?

विकासखंड में ऐसे दर्जनों मामले
बता दें कि इस तरह के विकासखंड में दर्जनों मामले हैं। इनमें कुछ की शिकायतें हुई, कुछ की नहीं हुई। कुछ मामलों की जांच भी हुई। सरपंच-सचिव दोषी भी पाए गए, जिसकी रिपोर्ट आज तक शिकायतकर्ता निकलवा कर घूम रहे हैं, पर कार्रवाई के नाम पर सभी मामलों को ठंडे बस्ते में डाला जा रहा है या जांच के बाद भी आरोपियों को बचाने की कवायद की जा रही है।
सरपंच-सचिव को नहीं पता शौचालय कौन बनवा रहा !
उक्त मामले में गोपालपुर के सरपंच आलेख भोई ने बताया कि जनपद पंचायत में शौचालय कौन और किस मद से बना रहा है, उन्हें नहीं पता, पर उपाध्यक्ष ने उन्हें कहा था कि वे रुपए पंचायत खाते में डलवा रहे हैं, उन्हें जनपद पंचायत में बनने वाले एक शौचालय का भुगतान करना है। इसके अलावा यही बात सचिव जयप्रकाश अवस्थी ने भी कही। आचर्य की बात यह है कि दोनों को ही नहीं मालूम कि शौचालय कौन बना रहा है और भुगतान उनके खाते में रुपए डालकर क्यों कराया जा रहा है। बता दें कि उक्त शौचालय एक ठेकेदार द्वारा बनाया जा रहा है, जिसकी जानकरी कथित कार्य एजेंसी को भी नहीं है। जनपद में कोई भी जिम्मेदार यह बताने तैयार नहीं है कि जनपद में निमार्णाधीन शौचालय आखिर ग्राम पंचायत गोपालपुर किस मद से बनवा रहा है।
मोबाइल रिसीव नहीं करते सीईओ
इस पूरे प्रकरण की जानकारी मिलने के बाद जनपद पंचायत सीईओ सीपी मनहर से मोबाइल के मध्यम से सम्पर्क का प्रयास किया गया, पर उन्होंने कॉल रिसीव करना मुनासिब नहीं समझा। बाद वाट्सएप के जरिए मैसेज कर उनका पक्ष जानना चाहा गया, पर मैसेज पढ़ने के बाद उन्होंने उक्त संबंध में कोई जानकारी देना या अपना पक्ष रखना मुनासिब नहीं समझा।
