नीट परीक्षा में गड़बड़ी लाखों बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ः विनोद।

प्रमोद दुबे 

महासमुंद – नीट यूजी के परीक्षा परिणाम में हुई गड़बड़ी को बेहद चिंताजनक बताते हुए पूर्व संसदीय सचिव विनोद सेवन लाल चंद्राकर ने सरकार के भ्रष्ट तंत्र का परिणाम बताते हुए देश के होनहार बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ ।
उन्होंने कहा कि पूरे देश भर के 24 लाख विद्यार्थियों ने इस सत्र नीट यूजी की परीक्षा में सहभागिता की। नीट यूजी पर मचा घमासान इस सरकार में चल रहे भ्रष्टाचार को उजागर करने वाला है। नीट परीक्षा में 24 लाख युवाओं का भविष्य टिका हुआ है। यह परीक्षा 17 साल से 25 साल आरक्षित श्रेणी में 30 वर्ष तक के बच्चे देते हैं। 720 अंकों की परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग के साथ पूरे 720 अंक पाना अभी तक मात्र 4- 5 छात्र ही कर पाते थे, इसलिए 67 छात्रों का यह कीर्तिमान पाना लगभग असम्भव है। मेधावी से मेधावी छात्र को भी 717, 718, 719 अंक नहीं मिल सकते। अगर एक सवाल गलत है तो नेगेटिव मार्किंग के चलते 715 और एक प्रश्न छोड़ने पर 716 अंक मिलेंगे। इसके अतिरिक्त, परीक्षा देर से शुरू होना, ग्रेस मार्क्स देना, पेपर लीक जैसे तमाम आरोप नैशनल टेस्टिंग एजेन्सी एनटी पर लगे हैं। माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने भी माना है कि परीक्षा की शुचिता प्रभावित हुई है। इस मामले में सबसे चिंताजनक है केंद्र सरकार का रवैया। नवनियुक्त शिक्षा मंत्री ने इस मामले में व्याप्त भ्रष्टाचार की गम्भीरता से जाँच कराने की बजाए खुद को ही क्लीनचिट दे डाली। ग्रेस मार्क्स वाले 1563 बच्चों की स्कोर शीट रद्द करके लीपा. पोती करने से देश के लाखों बच्चों को न्याय नहीं मिलने वाला। श्री चंद्राकर ने कहा कि नीट परीक्षा में हुई गडबड़ी दिन हमारे देश के होनहारों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। ज़रूरी है कि पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जाँच हो और ऊपर से नीचे शामिल सारे दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले। साथ ही कांग्रेस के न्याय पत्र में प्रस्तावित, पेपर लीक पर एक ऐसा कठोर कानून बने जिससे बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को सबक मिले। उन्होंने कहा कि एनटीए द्वारा छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। नीट यूजी का परीक्षा परिणाम 13 जून तक आने वाला था पर मोदी सरकार द्वारा एनटीए के कंधों पर अपनी कारगुजारियों का दारोमदार रखकर अपनी गलती को छुपाने और छात्रों को भ्रमित करने के लिए जानबूझकर लोकसभा चुनाव के परिणाम वाले ही परिणाम जारी किया गया। जिससे मिडिया, छात्रों और सामान्य जनमानस का ध्यान लोकसभा चुनाव के परिणामों पर हो और इनका यह भ्रष्टाचार उजागर ना हो सके। नीट यूजी के परिणाम में 61 विद्यार्थियों के एक जैसे नंबर आना कोई सामान्य बात नहीं है। और उसमे भी 8 लोग ऐसे है जिन्होंने कर्नाटक के एक ही संस्थान में बैठकर यह परीक्षा दी हो जिससे यह साफ स्पष्ट होता है कि यह पूर्ण रूप से शिक्षा का व्यापार है। पिछले 10 साल के कार्यकाल में मोदी सरकार का पैसा दो नंबर लो वाला एजेंडा रहा। श्री चंद्राकर ने आगे कहा कि जांच के बाद दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए और लाखों छात्र छात्राओं को मुआवजा देकर उनका साल बर्बाद होने से बचाया जाए। पिछले 10 वर्षों में मोदी सरकार ने पेपर लीक और धांधली से करोड़ों युवाओं का भविष्य बर्बाद किया है।