सनातन संस्कृति के पुरोधा प्रकृति के पुजारी थे:रुद्र नारायण
सुरेन्द्र मिनोचा
मनेंद्रगढ़/एमसीबी – ऋषियों ने प्रकृति पूजा में वट,पीपल और नीम जैसे पेड़ों की पूजा का विधान रख दिया था और माता, बहनों को उनकी पूजा के माध्यम से संतान की उन्नति का रास्ता बता कर पेड़ों की पूजा से जोड़ दिया,जो आज भी हमारी स्वस्थ संस्कृति की पहचान बन चुकी है। जिला पंचायत कोरिया के जन सम्पर्क अधिकारी एवं वरिष्ठ साहित्यकार श्री रूद्र नारायण मिश्र ने उक्ताशय के विचार फासिल्स पार्क में आयोजित पर्यावरण संगोष्ठी में व्यक्त किए।अतिथियों की उपस्थिति में वन माली सृजन केंद्र कोरिया के संयोजक वीरेंद्र श्रीवास्तव ने सबसे पहले विश्व पर्यावरण दिवस पर फासिल्स पार्क मनेन्द्रगढ़ में इस आयोजन की भूमिका प्रस्तुत करते हुए सायं 6.30 बजे संगोष्ठी का प्रारंभ किया।जिसे साहित्यकार गौरव अग्रवाल के कुशल संचालक ने कार्यक्रम को आगे बढ़ाया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आईएफएस नीरज जी ने विश्व पर्यावरण दिवस पर पर्यावरण जन जागृति के लिए एवं इस फॉसिल पार्क में अच्छे आयोजन के लिए संबोधन साहित्य संस्थान व वनमाली सृजन केंद्र कोरिया की सराहना की और आयोजन को एक प्रशंसनीय आयोजन निरूपित किया,उन्होंने इस फॉसिल पार्क को और विकसित करने के लिए नागरिकों के सुझाव आमंत्रित किए।जिला पंचायत कोरिया के प्रतिनिधि वरिष्ठ साहित्यकार रूद्र नारायण मिश्र ने कहा कि सनातन संस्कृति के पुरोधा प्रकृति के पुजारी थे।

उपवन मंडल अधिकारी मनेन्द्रगढ़,लक्ष्मी नारायण ठाकुर ने संबोधन संस्थान एवं वनमाली सृजन केन्द्र मनेन्द्रगढ़ द्वारा फासिल्स पार्क में 5 जून विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित संगोष्ठी में अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हसदो नदी के पावन तट पर पाया जाने वाला विश्व स्तरीय समुद्री जीवाश्म भारत की ऐसी पूंजी है जिसे आने वाली पीढियां को इसी स्वरूप में हमें सौंपना है।29 करोड़ वर्ष पुराना यह जीवाश्म समुद्र के मनेन्द्रगढ़ तक जुड़े रहने की और पृथ्वी पर जीवन उत्पत्ति के अंजान पन्नों का वह वैज्ञानिक दस्तावेज है, जिसे संरक्षित और विकसित करने की हमारी संयुक्त जिम्मेदारी है।विकास के कुछ कार्य वन मंडल मनेन्द्रगढ़ द्वारा किए गए हैं और विकास के कई अध्याय अभी बाकी है,जिसमें ज्ञानवर्धक वीडियो प्रस्तुति में इसके ऐतिहासिक परिपेक्ष को प्रस्तुत करने का उपक्रम का निर्माण भी प्रस्तावित है।
बैकुंठपुर के पुरातत्व विशेषज्ञ वाल्मीकि दुबे ने छत्तीसगढ़ की नदियों में हसदो की गरिमा को प्रस्तुत नहीं किए जाने पर चिंता व्यक्त की।उन्होंने कहा कि कई राज्यों को बिजली देने वाले छत्तीसगढ़ कोरबा के पावर प्लांट की जीवन दायिनी हरदोई पर बने बांगो बांध को आज पूरा देश जानता है किंतु छत्तीसगढ़ की नदियों की पहचान में यह अदृश्य नजर आती है यह चिंता का विषय है।

संबोधन संस्थान के अध्यक्ष अनिल जैन ने अपने उद्बोधन में कहा कि जब हम किसी छायादार पेड़ की छांव में बैठकर सुख का अनुभव करते हैं तब प्रकृति एवं पेड़ लगाने वालों को मन से धन्यवाद देते हैं इसी आशीर्वाद को आप भी एक पेड़ लगाकर प्राप्त कर सकते हैं।नई पीढ़ी को पर्यावरण के विचारों से जोड़ने के लिए विजय इंग्लिश मीडियम हायर सेकंडरी विद्यालय की छात्रा श्रुति एवं फातिमा ने अपने विचारों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण की सोच को आगे बढ़ाया।कार्यक्रम में मनेन्द्रगढ़ नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती प्रभा पटेल ने कहा कि यह मैरीन फॉसिल्स मनेन्द्रगढ़ का गौरव है, संबोधन साहित्य एवं कला विकास संस्थान की टीम को मैं बधाई देना चाहूंगी,जिनके लगातार कई वर्षों के प्रयास से अब इसके विकास को नई राह मिली है जो दूर तक जाएगी, आज मैं इस संस्था के साथ साथ नगर के गणमान्य नागरिकों की आभारी हूँ कि आपने मुझे इस मंच पर स्थान दिया।
कटगोड़ी सोनहत से आए डॉक्टर राजकुमार शर्मा ने साहित्यिक पर्यावरण की नई इबारत प्रस्तुत की जिसे सभी ने तालियां बजकर सराहा।सायं 5:30 बजे 6.30 तक गोंडवाना मैरीन फॉसिल्स के भ्रमण एवं विकास कार्यों का जायजा लेते हुए देर शाम तक चलने वाले इस संगोष्ठी कार्यक्रम में संबोधन साहित्य कला विकास संस्थान एवं वनमाली सृजन केंद्र मनेन्द्रगढ़ के सदस्यों, पत्रकारों, गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति के बीच निरंजन मित्तल,नरेंद्र श्रीवास्तव, डॉ राजकुमार शर्मा ,जयप्रकाश सिंह, परमेश्वर सिंह, पुष्कर तिवारी, रमेश गुप्ता ,सतीश गुप्ता, शराफत अली, रामचरित द्विवेदी, की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।
